महंगाई की मार पर कुछ इस तरह से RBI कर रहा पलटवार, जानिए क्या बड़े कदम उठाए
नई दिल्ली, 08 जून। लगातार बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया समय-समय पर जरूरी कदम उठाता है। रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति के जरिए बाजार में पैसों के प्रवाह को नियंत्रित करता है जिससे कि मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाया जा सके। महंगाई दर के बढ़ने की वजह से रिजर्व बैंक ने पिछले महीने बैंक रेट में बढ़ोत्तरी की थी और यह बढ़ोत्तरी आरबीआई की मौद्रिक नीति आने से पहले ही कर दी गई थी। लगातार दूसरे महीने आज रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए बैंक रेट में बढ़ोत्तरी की है। जिससे कि महंगाई दर को नियंत्रित किया जा सके।

महंगाई दर के आंकड़े से मजबूर आरबीआई
महंगाई दर की बात करें तो जनवरी माह में यह 6.01 फीसदी थी,जोकि अगले तीन महीने तक लगातार बढ़ती रही जिसके चलते रिजर्व बैंक को जरूरी कदम उठाने पड़े। फरवरी माह में महंगाई दर 6.07 फीसदी, मार्च माह में यह बढ़कर 6.95 फीसदी और अप्रैल माह में यह अपने रिकॉर्ड 7.79 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध भी है, जिसकी वजह से जरूरी उत्पादों की आपूर्ति बाधित हुई है और कच्चे तेल के दाम में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

कच्चे तेल के बढ़ते दाम चिंता का विषय
कमोडिटी प्राइस के बढ़ते दामों का सीधा असर आम जनता पर होता है,जिसके चलते जरूरी उत्पादों के दाम काफी बढ़ गए। मार्च तिमाही में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की वजह से कच्चे तेल के दाम काफी बढ़ गए थे और अप्रैल माह में महंगाई दर अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जिसके चलते रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को आपात बैठक करनी पड़ी और ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी करनी पड़ी।

विकास दर को बनाए रखने की चुनौती
महंगाई दर की चिंता को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि दो साल तक कोरोना चलते देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ था। ऐसे में रिजर्व बैंक के सामने एक तरफ जहां बड़ी चुनौती यह थी कि देश की विकास की रफ्तार को पटरी पर लाया जाए तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई पर लगाम कैसे लगाई जाए। कोरोना खत्म होने के बाद रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध ने आग में घी का काम किया और दो साल के बाद पहली बार रिजर्व बैंक ने बैंक रेट में बढ़ोत्तरी का फैसला लिया। हालात इसके बाद भी नहीं सुधरे और अब एक बार फिर से रिजर्व बैंक ने बैंक रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोत्तरी कर दी। यानि दो महीने के भीतर आरबीआई ने 90 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोत्तरी कर दी है।

सीआरआर में बढ़ोत्तरी
यही नहीं महंगाई दर को कम करने के लिए पिछले महीने रिजर्व बैंक ने कैश रिजर्व रेशियो में भी बढ़ोत्तरी की थी। 4 ई को रिजर्व बैंक ने सीआरआर में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोत्तरी की थी। आरबीआई के इस फैसले के बाद बैंकों को रिजर्व बैंक के पास अतिरिक्त पैसा जमा करना होगा। बता दें कि सीआरआर बैंकों का वह पैसा होता है जिसे उन्हें रिजर्व बैंक के पास रखना होता। इस पैसे पर बैंकों को आरबीआई ब्याज नहीं देता है। इस वक्त सीआरआर 4.50 फीसदी है। हालांकि अच्छी बात यह है कि इस बार आरबीआई ने सीआरआर में बढ़ोत्तरी नहीं की है।

एक महीने में बैंक रेट 90 बेसिस प्वाइंट बढ़ा
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति की बैठक में सभी सदस्यों ने एकमत होकर बैंक रेट को बढ़ाने के लिए अपनी सहमति दी। जिससे की सप्लाई और डिमांड को संतुलित किया जा सके। बता दें कि रेपो रेट वह रेट होता है जिसपर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। मई माह से पहले यह दर 4 फीसदी थी, लेकिन अब यह बढ़कर 4.90 फीसदी हो गई है। यानि अब बैंकों को आरबीआई से महंगी दर पर पैसा मिलेगा, लिहाजा इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, लोगों की ईएमआई बढ़ेगी।

लोन पर ईएमआई बढ़ेगी
रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद लोगों की आमदनी पर इसका सीधा असर पड़ेगा। लोगों के घर के लोन की ईएमआई, कार ईएमआई सहित अन्य लोन की ईएमआई बढ़ेगी। आरबीआई के इस फैसले से बाजार में पैसों की सप्लाई कम होगी और उत्पादों की खरीद में कमी आएगी, जिससे चीजों के दाम कम होंगे। रिजर्व बैंक के फैसले के बाद आम लोगों की ईएमआई तकरीबन 1200-2500 रुपए तक बढ़ सकती है। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि क्या रिजर्व बैंक के फैसले के बाद महंगाई पर कुछ लगाम लगेगी।












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