वित्त मंत्री का चुनावी बजट, बिना रेवड़ी बाटे ही कर दिया खेल
आगामी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आज अंतरिम बजट को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया है। ऐसे में इस बजट के जरिए मतदाताओं को हर संभव साधने की कोशिश की गई है।
चुनाव में महिलाओं को मध्यम वर्गीय मतदाता की भूमिका काफी अहम होती है और इस बात का एहसास सत्तारढ़ भारतीय जनता पार्टी और वित्त मंत्री को बखूबी था। यही वजह है कि आज पेश हुए बजट में इन दोनों वर्ग को सरकार ने अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की है।

वित्त मंत्री ने आज के बजट में विकास और राजकोषी के बीच समन्वय बैठाने के साथ मतदाताओं को रिझाने की भी कोशिश की है। लेकिन खास बात यह है कि सरकार ने इस बजट में मुफ्त की रेवड़ी नहीं बांटी है, यही वजह है कि वित्त मंत्री के बजट को आगामी चुनाव से पहले सधा हुआ और रणनीतिक बजट बताया जा रहा है।
लखपति दीदी योजना
सरकार की ओर से इस बजट में लखपति दीदी योजना का ऐलान किया गया है, जोकि इस बजट में सबसे ज्यादा चर्चा में है। जैसा की नाम से जाहिर होता है कि सरकार की यह योजना महिलाओं को और सशक्त करने पर जोर दे रही है, उन्हें खुद पर निर्भर होने, उद्योग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका देना चाहती है।
सरकार स्वयंसेवी महिला संस्थाओं को भी बढ़ावा देना चाहती है। जो महिलाएं वर्ष में एक लाख रुपए से अधिक कमाती हैं उन्हें लखपति दीदी के नाम से जाना जाएगा। ऐसे में सरकार ऐसी महिलाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं को मदद करेगी ताकि उनकी आय को एक लाख से अधिक किया जा सके।
देश के ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक परिवेश को बदलने का काम 83 लाख स्वयंसेवी संस्थाओं की तकरीबन 9 करोड़ महिलाएं कर रही हैं। ये वो महिलाएं हैं जो आत्मनिर्भर हैं। इनकी सफलता के चलते तकरीबन एक करोड़ महिलाएं लखपति बन चुकी हैं।
इन संस्थाओं की सफलता को देखते हुए सरकार ने लखपति दीदी की संख्या को बढ़ाने पर जोर देने का फैसला लिया है और इसे 2 से 3 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान इसका जिक्र किया।
लखपति दीदी योजना चुनाव में पलट सकती है बाजी
सरकार लखपति दीदी योजना के जरिए देशभर में महिला मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की कोशिश करेगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्कीम सरकार के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है।
ये वो महिलाएं हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर ना सिर्फ अच्छी आय हासिल कर रही हैं बल्कि खुद से वोट भी करती हैं, ये महिलाएं परिवार में लोगों को अपनी राजनीतिक सोच से भी प्रभावित करती हैं। जो एक करोड़ महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं वह अपनी संख्या से कहीं अधिक संख्या में लोगों को प्रभावित कर सकती हैं।
आशा कार्यकर्ताओं को तोहफा
इसके साथ ही सरकार ने 35 लाख आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य बीमा देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि इन महिलाओं को आयुष्मान भारत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कवर किया जाएगा।
भारत में तकरीबन 10 लाख आशा वर्कर हैं, जोकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में मदद करती हैं। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की बात करें तो इनकी संख्या 13 लाख है, जबकि 12 लाख आंगनवाड़ी सहायिकाएं हैं। लिहाजा इस वर्ग को मोदी सरकार अपने पक्ष में करके आगामी चुनाव में एक बड़ा लाभ हासिल कर सकती है।
मिडल क्लास परिवार के लिए घर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मध्यमवर्गीय परिवारों के सबसे निचले तबके को अपनी ओर करने की कोशिश की है। ये वो लोग हैं जो किराए के घर में रहते हैं, बस्तियों आदि में रहते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इन लोगों के लिए आवास योजना को लॉन्च करेगी ताकि यह वर्ग अपना घर खरीद सके, या फिर खुद से अपने घर का निर्माण कर सके।
इसके अलावा एक करोड़ घरों में सोलर पैनल लगवाने के लिए भी सरकार की ओर से मदद का ऐलान किया गया है। सरकार की यह स्कीम भी आने वाले चुनाव में भाजपा के लिए अहम साबित हो सकती है।












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