सूत्रों ने किया खुलासा: RBI की अगली बोर्ड मीटिंग में सरकार खेलेगी पावर प्ले
नई दिल्ली। आगामी 14 दिसंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की बैठक हंगामेदार होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में सरकार कर्ज देने पर लगी पाबंदियों में थोड़ी ढील देने के साथ ही संचालन के नियमों की समीक्षा का दबाव बनाने वाली है। न्यूज18 के मुताबिक तीन सूत्रों ने बताया कि 19 नवंबर को हुई बोर्ड की मीटिंग में 18 सदस्यीय बोर्ड सरकारी उम्मीदवारों के साथ खड़ा है। एक सूत्र ने बताया कि सरकार की तरह ही कई बोर्ड मेंबर्स यह महसूस करते हैं कि आरबीआई को अपने फैसलों के लिए ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए।

नवंबर की मीटिंग से पहले पीएम मोदी के प्रशासन में सीनियर अधिकारियों ने दबाव बढ़ा दिया था। यह दबाव पब्लिक और प्राइवेट तरीके से बढ़ाया गया था जो पॉलिसी मामलों से जुड़ा था। यह चिंता भी जाहिर की गई थी कि आरबीआई को अपनी स्वतंत्रता खोने का खतरा है। मई में आम चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में वोटर कमजोर कृषि आय को लेकर चिंतित है। मोदी सरकार चाहती है कि अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाए और वह आरबीआई से आसान उधार नीति की अपेक्षा कर रही है।
एक पूर्व वरिष्ठ आरबीआई अधिकारी ने बताया कि इस समय आरबीआई और सरकार के बीच संबंध बिल्कुल फैली हुई रबड़ की तरह हैं। एक बार रबड़ को खींच दिया जाए तो फिर वह अपने पहले के स्वरूप में नहीं आ सकती। केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता पर इस महत्वपूर्ण हमले को लंबे समय तक याद किया जाएगा। इससे पहले खबर आई थी कि आरबीआई और केंद्र सरकार के मतभेद के बीच गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं। पूर्व में, बोर्ड ने एक सलाहकार निकाय से थोड़ा अधिक काम किया है, लेकिन केंद्रीय बैंक की स्थापना के 1934 के कानून के तहत उसके पास असली दांत रखने और नीति परिवर्तन को लागू करने की क्षमता है।












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