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Gold Silver Budget 2026: बजट में घटेगी कस्टम ड्यूटी तो कितना सस्ता होगा सोना-चांदी? पढ़ें Expert Opinion

Gold Silver Budget 2026: एक फरवरी को पेश होने वाला सिर्फ टैक्स और योजनाओं तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर भी दिख सकता है। खासकर सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए यह बजट बेहद अहम माना जा रहा है।

बाजार और इंडस्ट्री से जुड़ी उम्मीदों के मुताबिक सरकार सोना-चांदी पर कस्टम ड्यूटी 6% से घटाकर 4% कर सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो कीमतों में सीधी गिरावट देखने को मिल सकती है।

Gold Silver Budget 2026

▶️ बजट के बाद सोना-चांदी कितनी सस्ती हो सकती है? (Gold Silver Price Impact)

  • बाजार के अनुमान बताते हैं कि अगर कस्टम ड्यूटी 2% घटती है, तो सोना प्रति 10 ग्राम करीब 3000 रुपये तक सस्ता हो सकता है। वहीं चांदी की कीमत में 6000 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आ सकती है।
  • फिलहाल जनवरी 2026 में 24 कैरेट सोना करीब 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 3.50 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही है। ऐसे में बजट के बाद खरीदारों को सीधी राहत मिल सकती है।
  • सरकार के सामने बजट में सोना और चांदी पर कस्टम ड्यूटी घटाने की सबसे बड़ी वजह तस्करी पर लगाम मानी जा रही है। इस समय सोने पर 6 प्रतिशत इम्पोर्ट ड्यूटी और 3 प्रतिशत जीएसटी लगता है। यानी कुल टैक्स बोझ करीब 9 प्रतिशत बैठता है।
  • यही ऊंचा टैक्स ग्रे मार्केट को फायदा पहुंचाता है। तस्करी करने वाले लोग इस टैक्स को बचाकर प्रति किलो सोने पर लगभग 11.5 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा लेते हैं।

▶️ इतनी तेजी क्यों आई सोना-चांदी में? (Gold Silver Rally Reason)

2025 निवेशकों के लिए ऐतिहासिक साल रहा। आंकड़ों के मुताबिक सोने की कीमतें करीब 75% तक बढ़ीं। जबकि चांदी में 167% की जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
वैश्विक अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल टेंशन, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने इन कीमती धातुओं को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

▶️ सरकार कस्टम ड्यूटी क्यों घटा सकती है? (Custom Duty Cut Reason)

  • सबसे बड़ी वजह है सोने की तस्करी।
  • इस समय सोने पर
  • 6% इम्पोर्ट ड्यूटी
  • और 3% GST
  • मिलाकर कुल टैक्स करीब 9% बैठता है।

अगर सरकार कस्टम ड्यूटी और कम करती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू कीमतों के बीच का अंतर घट जाएगा। इससे तस्करी का आकर्षण कम होगा और सोने का कारोबार ज्यादा हद तक आधिकारिक चैनल के जरिए होने लगेगा।सरकार इससे पहले भी ऐसा कदम उठा चुकी है।

ड्यूटी में कटौती का फायदा सिर्फ खरीदारों तक सीमित नहीं रहता। इससे ज्वेलरी बनाने की लागत घटती है, जिससे भारतीय ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत पर मुकाबला करने का मौका मिलता है।

▶️ पहले भी घट चुकी है ड्यूटी, क्या हुआ था असर? (Gold Duty History)

जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी 15% से घटाकर 6% कर दी थी। नतीजा यह रहा कि सोने की डिमांड करीब 10% बढ़ी, ज्वेलरी इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिला और कीमतों में थोड़ी नरमी भी देखने को मिली। सरकार अब इसी मॉडल को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकती है।

▶️ चांदी पर ड्यूटी घटने से किसे फायदा होगा? (Silver Industry Impact)

चांदी सिर्फ निवेश या गहनों तक सीमित नहीं है। EV, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अगर चांदी पर ड्यूटी कम होती है तो मैन्युफैक्चरिंग लागत घटेगी ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा और भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी।

▶️ एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं गोल्ड की चाल पर? (Gold Market Outlook)

वनइंडिया हिंदी से बातचीत में Vibhavangal Anukulakara Pvt. Ltd. के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्य का कहना है कि बजट 2026 से पहले सोना और चांदी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि सरकार की वित्तीय नीतियां, खासतौर पर इम्पोर्ट ड्यूटी में होने वाले बदलाव, देश में इनकी मांग को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार ड्यूटी में राहत देती है, तो सोना-चांदी के दामों में कुछ नरमी आ सकती है, जिससे खरीदारी को बढ़ावा मिलेगा। इकोनॉमिक सर्वे में भी यह बात सामने आई है कि सोना और चांदी सेफ-हेवन एसेट के तौर पर आगे भी महंगे बने रह सकते हैं, जिससे कीमतों को एक मजबूत आधार मिलता है।

आगे के समय को देखते हुए सिद्धार्थ मौर्य मानते हैं कि अनिश्चितता के दौर में सोना निवेशकों के लिए सुरक्षा कवच बना रहेगा, जबकि चांदी में रणनीतिक तौर पर अच्छा रिटर्न देने की संभावना मौजूद है।

हमारी इनहाउस वेबसाइट गुडरिटर्न्स से बात करते हुए LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। उनके CME में गोल्ड 4800 से 5200 डॉलर के दायरे में रह सकता है। MCX में गोल्ड 1.58 लाख से 1.70 लाख रुपये के बीच घूम सकता है। जब तक खरीदार और विक्रेता के बीच संतुलन नहीं बनता, तब तक वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।

▶️ ज्वेलरी इंडस्ट्री को बजट से क्या उम्मीद? (Budget 2026 Expectations)

Sky Gold के MD मंगेश चौहान के मुताबिक,जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को ऐसे सुधारों की जरूरत है जो लागत घटाएं ट्रेड प्रक्रिया आसान बनाएं और ग्लोबल मार्केट में भारत की पकड़ मजबूत करें।

इंडस्ट्री चाहती है कि सोना, चांदी, प्लेटिनम और कीमती रत्नों पर इम्पोर्ट ड्यूटी को तर्कसंगत बनाया जाए। GST को 3% से घटाकर 1-1.25% किया जाए। एयरपोर्ट्स पर Tourist GST Refund स्कीम जल्द लागू हो।

▶️ तो सवाल बड़ा है, अभी खरीदें या बजट के बाद? (Buy Gold Before Budget)

अगर आप निवेश के लिए सोना-चांदी खरीद रहे हैं और आपको थोड़ा इंतजार करने का वक्त है तो बजट के बाद बेहतर मौके मिल सकते हैं। लेकिन अगर शादी या जरूरत के लिए खरीदारी जरूरी है तो बाजार में गिरावट आने पर आंशिक खरीद भी एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

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