Cyrus Mistry: अपने पीछे 70000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति, इन देशों में शानदार घर छोड़ गए साइरस मिस्त्री
Cyrus Mistry: अपने पीछे 70000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति, इन देशों में हैं शानदार घर छोड़ गए साइरस मिस्त्री
मुंबई। टाटा संस के पूर्व चेयरमैन और बड़े उद्योगपति साइरस मिस्त्री( Cyrus Mistry) की आज एक सड़क हादसे में मौत हो गई। अहमदाबाद से मुंबई लौटते वक्त महाराष्ट्र के पालघर के पास उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद उद्योग जगत में दुख की लहर दौड़ पड़ी। 4 जुलाई 1968 को जन्मे साइरस मिस्त्री का नाम विवादों में जुड़ा रहा। टाटा से जुड़ने के बाद से ही साइरस मिस्त्री का नाम कई विवादों से जुड़ा रहा है। टाटा के साथ उनका विवाद लंबे वक्त तक चला। साल 2012 में वो टाटा के चेयरमैन बने और 2016 में उन्हें हटा दिया गया। विवाद भले ही उनके नाम के साथ जुड़ा हो, लेकिन संपत्ति के मामले में वो देस के दिग्गज उद्योगपतियों में शामिल थे। साइरस मिस्त्री के पिता पालोंजी मिस्त्री भी बहुत बड़े बिजनेस टायकून रहे। अपने पीछे वो करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए हैं।

70000 करोड़ की संपत्ति
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो 2018 में साइरस मिस्त्री की व्यक्तिगत नेटवर्थ 70957 करोड़ रुपए से अधिक थी। उनके पास कंस्ट्रक्शन से लेकर इंटरटेनमेंट, पावर से लेकर फाइनेंस तक का कारोबार था। उन्होंने अपने नेतॉत्व में शापूरजी पालोंजी मिस्त्री कंपनी के देश के अलावा विदेशों में विस्तारित किया। मध्य एशिया और अफ्रीका में उनकी कंपनी कंस्ट्रक्शन, पावर प्लांट, इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट के क्षेत्र में दिग्गज कंपनी बनी।

कई देशों में आलिशान घर
साइरस मिस्त्री ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की थी। वो अपने परिवार के साथ मुंबई के एक बड़े घर में रहते थे। इसके अलावा कई देशों में उनके घर थे। साइरस मिस्त्री का घर आयरलैंड, लंदन और दुबई में अपना आल्शान घर है। इसके अलावा उनके पास एक से बढ़कर एक लग्जरी गाड़ियां है। साइरस मिस्त्री के नाम पर शानदार यॉट भी है। इसके अलावा निजी जेट फ्लीट भी रहा। साइरस मिस्त्री के पास आयरलैंड की नागरिकता थी

टाटा के साथ विवाद
साइरस मिस्त्री टाटा समूह में चैयरमैन समूह की जिम्मेदारी संभालने वाले गैर-टाटा परिवार के दूसरे व्यक्ति थे। इससे पहले 1932 में नौरोजी सकलतवाला टाटा के चेयरमैन बने थे, जिन्होंने कार्यभार संभाला था। टाटा के साथ उनका विवाद काफी लंबा चला। कारोबार में कई चुनौतियों से जूझने के बाद वो टाटा को घाटे से बचाने के लिए विनिवेशन का फैसला लेने को मजबूर हो गए। उनके फैसलों के कारण टाटा को घाटा होने लगा, जिसके बाद टाटा ट्रस्ट की सलाह पर उन्हें 2016 में टाटा के चेयरमैन पद से बर्खास्त कर दिया गया। किया गया है।
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