2 साल से IRCTC वेबसाइट और मोबाइल ऐप में थी खामी, यात्रियों की निजी जानकारी खतरे में
नई दिल्ली। IRCTC ने आखिरकार अपने वेबसाइट और एप से बड़ी खामी को दूर करने में कामियाबी हासिल कर ली है। इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन को इस खामी को दूर करने में 2 साल का लंबा वक्त लग गया। आईआरसीटीसी की ये खामी अगर हैकर्स के हाथों लग जाती तो यात्रियों की पर्सनल जानकारी लीक हो सकती थी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईआरसीटीसी की ये खामी उनसकी वेबसाइट और ऐप से लिंक थी, जो फ्री ट्रैवल इंश्योरेंस को किसी तीसरी इंश्योरेंस कंपनी से कनेक्ट करती थी। अगर ये बग हैकर्स के साथ लग जाती तो आईआरसीटीसी से टिकट बुक करवाने वाले लोगों को यात्रियों के नाम, उम्र, लिंग, यात्रा के जानकारी, इंश्योरेंस नॉमिनी के नाम, उनकी उम्र और उनका मोबाइल नंबर लीक हो जाता।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आईआरसीटीसी को इस बग की जानकारी 14 अगस्त को लगी थी। साल 2016 में रेलवे ने यात्रियों को फ्री ट्रैवल इंश्योरेंस की सुविधा मिलनी शुरू हुई थी, जिसे सितंबर में रेलवे ने बंद कर दिया। इसके बाद से यूजर्स को ट्रैवल इंश्योरेंस चुनने का विकल्प दिया जाने लगा। 2016 से 2018 के बीच आईआरसीटीसी की ये खामी उजागर नहीं हो सकी। हालांकि इस दौरान यात्रियों की जानकारी लीक हुई की नहीं इस बारे में आईआरसीटीसी ने कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि अब इस बग को अब हटा दिया गया है।
गौरतलब है कि रेलवे ने 2016 में बाई डिफॉल्ट फ्री ट्रैवल इंश्योंरेस देने का काम शुरू किया। जिसके तहत यात्रा टिकट बुक करने पर लोगों को फ्री इंश्योरेंस मिलता था। जिसमें नॉमिनी की डिटेल भरनी होती थी। जिसके बाद यात्रा के दौरान किसी दुर्घटना का शिकार होने पर यात्री को इंश्योरेंस की रकम दी जाती थी। सफर करने वाले यात्री की मृत्यु होने पर उनके नॉमिनी को वो रकम दी जाती थी।












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