Budget 2026: 'बौद्ध सर्किट', 4,000 इलेक्ट्रिक बसें, बजट में नॉर्थ ईस्ट की बल्ले-बल्ले, क्या-क्या मिला?
Budget for North East State: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए पूर्वोत्तर भारत (North-East India) के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। इस बजट में बुनियादी ढांचे, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवा पर विशेष जोर देते हुए पूर्वोत्तर को एक आधुनिक आर्थिक हब बनाने का संकल्प लिया गया है।
'पूर्वोदय योजना' के तहत कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक विरासत के संगम के साथ-साथ राज्यों को वित्तीय मजबूती देने के लिए भारी आवंटन किया गया है। यह बजट न केवल क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने वाला है, बल्कि भारत को ग्लोबल मेडिकल हब बनाने की दिशा में पूर्वोत्तर को एक नई पहचान दिलाने के लिए तैयार किया गया है।

North East Buddhist Circuit: 5 राज्यों में बौद्ध सर्किट का निर्माण
पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मानचित्र पर लाने के लिए अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मिजोरम और त्रिपुरा में 'बौद्ध सर्किट' विकसित किया जाएगा। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों को भी मजबूती देगी। धार्मिक पर्यटन से स्थानीय रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प होगा।
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E-Buses for North East: 4,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का फैसला
सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राज्यों के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। यह राशि ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों (Local Bodies) के विकास पर खर्च की जाएगी। इसके अलावा, पूर्वोत्तर में पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए 4,000 इलेक्ट्रिक बसें (E-Buses) प्रदान की जाएंगी, जो क्षेत्र की हवा को शुद्ध रखने और आवाजाही को सस्ता बनाने में मदद करेंगी।
मेडिकल टूरिज्म: 5 रीजनल हब की स्थापना
भारत को 'मेडिकल टूरिज्म हब' बनाने के विजन के साथ राज्यों के सहयोग से देश में 5 रीजनल मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेंटर्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय मरीजों को आकर्षित किया जा सकेगा, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उनके करीब ही मिल सकेंगी।
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आर्थिक स्थिरता: राजकोषीय घाटे और कर्ज पर नियंत्रण
बजट में राजकोषीय अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को जीडीपी के 4.5% से नीचे रखने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, देश के कुल कर्ज को इकोनॉमी के 50% के भीतर लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य 2031 तक हासिल करने की योजना है। यह मजबूत वित्तीय प्रबंधन भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
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