बजट 2017: 8 क्षेत्रों में विशेष ध्‍यान देगा वित्‍त मंत्री अरुण जेटली का बजट

नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली के साथ-साथ वित्‍त मंत्रालय के अधिकारियों की पूरी टीम बजट बनाने में जुटी हुई है। वित्‍त वर्ष 2017-18 के बजट में क्‍या होगा खास, इस विषय में सब अंदाजा ही लगा रहे है

नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली के साथ-साथ वित्‍त मंत्रालय के अधिकारियों की पूरी टीम बजट बनाने में जुटी हुई है। वित्‍त वर्ष 2017-18 के बजट में क्‍या होगा खास, इस विषय में सब अंदाजा ही लगा रहे हैं। देश भर की इंडस्‍ट्रीज अपने सेक्‍टर को रियायत देने के लिए लगातार वित्‍त मंत्री को पत्र लिखकर खुद की ओर ध्‍यान आर्कषित करने में लगे हुए हैं। 1 फरवरी 2017 को पेश किया जाने वाला बजट देश की अर्थव्‍यवस्‍था को तेजी देने के नए रास्‍ते खोल सकता है तो वहीं दूसरी तरफ सरकार अर्थव्‍यवस्‍था को कमजोर करने वाली चुनौतियों से भी निपटने के असुलझे सवालों के जवाबद ढूंढने में लगी होगी। बजट तैयार करने के साथ देश के दिए जाने वाला बजट भाषण भी वित्‍त मंत्री अरुण जेटली के दिमाग में होगा। फिर भी वन इंडिया हिंदी उम्‍मीद जता रहा है कि इन महत्‍वपूर्ण सेक्‍टर और लिए गए पहले के निर्णयों को और ज्‍यादा अच्‍छी तरह से लागू करने के रास्‍ते बजट में ढूंढे जा सकते है। आइए जानते हैं कि वित्‍त वर्ष 2017-18 के बजट में केंद्र सरकार को किन बातों पर रह सकता है जोर?

बजट 2017: 8 क्षेत्रों में विशेष ध्‍यान देगा वित्‍त मंत्री अरुण जेटली का बजट

इनकम टैक्‍स

इनकम टैक्‍स

इनकम टैक्‍स-वित्‍त वर्ष 2017-18 के बजट में केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली आयकर स्‍लैब को बढ़ा सकते हैं। वित्‍त वर्ष 2017-18 के बजट में केंद्र सरकार इनकम टैक्‍स स्‍लैब में बदलाव करती है। पहले कहा जा रहा था कि सरकार टैक्‍स स्‍लैब को 2.50 लाख से बढ़ाकर 4 लाख कर देगी। पर अब माना जा रहा है कि सरकार 3 लाख या 3.50 लाख रुपए बजट स्‍लैब को निर्धारित कर सकती है। अभी देश में 2.50 लाख से ज्‍यादा सालाना आय वालों को टैक्‍स देना पड़ता है। इसके अलावा सरकार कम अवधि के लिए जमा राशि पर टैक्‍स की दर को घटा सकती है। 80 सी के तहत मिलने वाली टैक्‍स राहतों को और ज्‍यादा बढ़ाया जा सकता है। सरकार का पूरा जोर इस बात पर होगा कि लोग पैसा अपने पास रोककर न रखें जितना ज्‍यादा पैसा बाजार में आएगा, बाजार उतना ही ज्‍यादा संभलेगा।

नोटबंदी

नोटबंदी

नोटबंदी- पिछले साल 8 नवंबर, 2016 को देश में विमुद्रीकरण का फैसला लागू करने के बाद सरकार के लिए यह बजट पेश करना एक चुनौती से कम नहीं है। इस फैसले का असर भले ही लंबे समय में अर्थव्‍यवस्‍था में होगा। पर कम समय में इससे कम आय वर्ग वाले लोगों को दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा है। सबसे ज्‍यादा दिक्‍कत इस फैसले के दौरान गैर शिक्षित वर्ग को झेलनी पड़ी है। ऐसे में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली नोटबंदी के फैसले को और ज्‍यादा कारगर बनाने और डिजिटल पेमेंट को बढ़ाने से संबंधित फैसला कर सकते हैं। इसलिए नगद लेन-देन कम हो, इसको लेकर सरकार बजट में कोई नई घोषणा कर सकती है। साथ ही बैंकों से नगद निकालने वाले लोगों पर टैक्‍स लगाने का फैसला भी सरकार बजट में ले सकती है।

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (जीएसटी)

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (जीएसटी)

जीएसटी लागू होने के बाद राज्‍यों को मिलने वाले राजस्‍व बंटवारें और जीएसटी की दर को लेकर अधिकतकर राज्‍यों में आम राय बनी है। इस जीएसटी को 1 अप्रैल, 2017 से लागू होना था। अब सरकार का कहना है कि यह 1 जुलाई, 2017 से सभी राज्‍यों में लागू होगा। पूरे देश में जीएसटी को कैसे-कैसे लागू किया जाएगा और सभी राज्‍यों में टैक्‍स की दरें क्‍या होंगी। इस बावत बजट में पूरा एक विस्‍तत रूप रेखा सामने आ सकती है।

कॉरपोरेट टैक्‍स

कॉरपोरेट टैक्‍स

इनकम टैक्‍स-वित्‍त वर्ष 2017-18 के बजट में केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली कॉरपोरेट इनकम टैक्‍स की दर को घटा सकते हैं। बजट 2017 में केंद्र सरकार कॉरपोरेट टैक्‍स में 1.25 से 1.50 फीसदी की कमी कर सकती है। अभी कॉरपोरेट इनकम टैक्‍स 30 फीसदी लिया जाता है।

रेलवे

रेलवे

रेलवे- क्‍योंकि स्‍वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार रेल बजट को अलग से पेश नहीं किया जाएगा। इसलिए सरकार रेलवे को लेकर होने वाली लुभावनी घोषणाओं से पूरी तरह से बचेगी। केंद्र सरकार का पूरा ध्‍यान इस बात पर होगा कि किस तरह से रेलवे हर साल सरकार को कम से कम 10,000 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचा सके। साथ ही बुलेट ट्रेल, रेलवे यूनिवर्सिटी, राष्‍ट्रीय रेल संरक्षा कोष जैसी बातों पर सरकार ज्‍यादा ध्‍यान दे सकती है।

कृषि

कृषि

कृषि- नोटबंदी के फैसले का सबसे ज्‍यादा असर ग्रामीण इलाकों में हुआ है। किसानों के लिए सरकार पहले भी खरीफ और रबी की फसल को लेकर 60 दिनों के ब्‍याज को माफ कर चुकी है। इस बार भी ग्रामीण इलाकों और किसानों के लिए कुछ बड़े फैसले किए जा सकते हैं। किसानों को भी डिजिटल पेमेंट प्रकिया से जोड़ने के लिए सरकार कुछ ऐसा कर सकती है।

मैन्‍युफैक्‍चरिंग

मैन्‍युफैक्‍चरिंग

मैन्‍युफैक्‍चरिंग-राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पहले ही देश में कम होते नौकरियों के अवसर को लेकर सरकार को चेता चुके हैं। नोटबंदी के बाद देश की अर्थव्‍यवस्‍था की तेजी का अनुमान भी घटा लिया गया है। ऐसे में सरकार मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर को बूस्‍ट देने के लिए एमएसएमई सेक्‍टर को कई नए स्‍पेशल पैकेज दे सकती है। मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के अलावा सरकार को पूरा ध्‍यान अधिक से अधिक नई नौकरियां पैदा करने पर ही होगा।

विदेशी निवेश को बढ़ावा देना

विदेशी निवेश को बढ़ावा देना

देश में नोटबंदी के फैसले के बाद से अब तक मार्केट से विदेशी निवेशकों ने 71,000 करोड़ रुपया बाजार से वापस ले लिया है। इसका सीधा सा मतलब है कि विदेशी निवेशकों भारतीय बाजार पर या फिर वर्तमान नीतियों पर प्रभाव कम हुआ है। बाजार में बढ़ते अविश्‍वास के चलते बाजार से बड़ी मात्रा में रुपया वापस ले लिया गया। अब अरुण जेटली एक बार फिर से विदेशी निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाकर प्रत्‍यक्ष व‍िदेशी निवेश, वेंचर कैपिटल, प्राइवेट इक्विटी में उनके निवेश को बढ़ावा दे सकती है। Read more: बजट 2017: इनकम टैक्‍स में मिलेगी छूट या फिर करना होगा लंबा इंतजार

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