बड़ी खबर: RBI ने कैंसिल किया इस बैंक का लाइसेंस, जानें क्या होगा खाताधारकों पर असर?
बड़ी खबर: RBI ने कैंसिल किया इस बैंक का लाइसेंस, जानें क्या होगा खाताधारकों पर असर?
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक और सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। गुरुवार, 13 मई को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल के को ऑपरेटिव बैंक यूनाइडेट को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया। आरबीआई की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर इसकी जानकारी दी गई है । केंद्रीय बैंक ने तत्काल प्रभाव ने बैंक के लाइसेंस को रद्द करते हुए बैंकिंग संबंधी कामकाज पर रोक लगा दिया है। बैंक के लाइसेंस रद्द होने की जानकारी मिलने के बाद बैंक के खाताधारकों को अपनी जमापूंजी की चिंता सताने लगी है। वहीं आरबीआई ने सभी खाताधारकों को विश्वास दिलाया है कि उनकी जमापूंजी सुरक्षित हैं, जो उन्हें जल्द मिल जाएगी।

यूनाइटेड को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द
पश्चिम बंगाल में संचालित होने वाली को-ऑपरेटिव बैंक यूनाइटेड को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के लाइसेंस को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रद्द कर दिया है। आरबीआई की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया है कि बैंक के पास कारोबार को जारी रखने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है और न ही कमाई की कोई भी संभावना है। ऐसे में खाताधारकों की सुरक्षा को देखते हुए बैंक के कारोबार को बंद करना ही उचित है। बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ धारा 11 (1) और धारा 22(3)(डी) के प्रावधानों का पालन नहीं करने पर आरबीआई ने बैंक पर कार्रवाई की है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस रद्द होने के साथ ही यूनाइटेड को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के बैंकिंग व्यवसाय करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

3 साल पहले भी हुई थी कार्रवाई
आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यूनाइटेड को-ऑपरेटिव बैंक को पहले भी चेताावनी जारी की थी। बैंक के खिलाफ 3 साल पहले 18 जुलाई 2018 को भी कार्रवाई की गई थी। स्थिति में सुधार न होने के बाद अब बैंक के लाइसेंस को रद्द कर दिया गय। उस वक्त भी आरबीआई ने सख्त कार्रवाई करते हुए बैंक को निवेश, लोन देने, किसी भी बैंकिंग स्कीम के नवीनीकरण जैसी तमाम बैंकिंग सेवाओं पर रोक लगा दी थी।

क्या होता खाताधारकों का
बैंक के खाताधारकों को घबराने की जरूरत नहीं है। बैंक का लाइसेंस रद्द होने के बावजूद भी उनकी जमापूंजी सुरक्षित है। उनकी जमापूंजी उन्हें वापस मिल जाएगी। जमाधारकों की कुल जमा में से अधिकतम 5 लाख तक की रकम उन्हें निश्चित तौर पर मिलेगी। डीआइ्रसीजीसी एक्ट, 1961 के तहत बैंक के जमाकर्ताओं को उनकी रकम लौटा दी जाएगी। बैंकिंग नियम के मुताबिक बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार सभी जमाकर्ताओं को उनकी पूरी रकम लौटाई जाएगी, हालांकि इसमें 5 लाख रुपए तक की सीमा का पालन भी किया जाएगा।












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