वेदांता को निजी कंपनी बनाने जा रहे हैं अनिल अग्रवाल, 16,200 करोड़ में खरीदेंगे शेयर
नई दिल्ली। देश के बड़े कारोबारी अनिल अग्रवाल अपनी कंपनी वेदांता लिमिटेड को निजी कंपनी बनाने जा रहे हैं। ये कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड है। इस बात की घोषणा उन्होंने मंगलवार को की है। वह भारत में सूचीबद्ध कंपनी वेदांता लिमिटेड के सभी सार्वजनिक शेयर वापस खरीद कर इसे अपनी निजी कंपनी बनाएंगे। अनिल अग्रवाल ने ये एलान कर दिया है कि वो वेदांता लिमिटेड को भारतीय शेयर बाजार से डीलिस्ट कराने की तैयारी में हैं।

अग्रवाल के नियंत्रण वाली वेदांता रिसोर्सिज समूह की कंपनी वेदांता लिमिटेड कंपनी अपने करीब 49 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारकों से शेयर खरीदने के लिए 16,200 करोड़ रुपये में 87.5 रुपये प्रति शेयर की खरीद पेशकश करेगी। कंपनी के शेयर का यह मूल्य मंगलवार को बंबई शेयर बाजार (BSE) में वेदांता लिमिटेड के शेयर के बंद भाव 89.30 रुपये प्रति शेयर से भी कम है।
वेदांता लिमिटेड ने एक सूचना में कहा कि उसके प्रवर्तक समूह वेदांता रिसोर्सिज ने अपनी इस मंशा को जाहिर किया है कि वह अकेले अथवा समूह की एक या फिर अधिक अनुषंगियों के साथ मिलकर कंपनी के सभी पूर्ण चुकता इक्विटी शेयरों का अधिग्रहण करेगी। यानी कंपनी के सार्वजनिक शेयरधारकों के पास रखे सभी शेयरों की खरीद होगी। प्रवर्तक समूह के अन्य सदस्यों के साथ वेदांता रिसोर्सिज लिमिटेड के पास वर्तमान में वेदांता लिमिटेड के 51.06 फीसदी शेयर हैं, जबकि सार्वजनिक शेयरधारकों के पास कंपनी के 169.10 करोड़ यानी 48.94 फीसदी शेयर हैं।
बताया जा रहा है कि ये फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि वेदांता समूह बीते कई सालों से कॉर्पोरेट सिम्पलीफिकेशन करने की प्रक्रिया में हैं। इस प्रक्रिया के तहत ही 2012 में सेसा-स्टरलाइट (इसे बाद में वेदांता नाम दिया गया ) नाम की कंपनी बनाने के लिए स्टरलाइट को सेसा गोवा के साथ मर्ज किया गया था, फिर साल 2016 में Cairn का वेदांता में मर्जर किया गया और फिर 2018 में वेदांता रिसोर्सेज की डीलिस्टिंग की गई। वेदांता समूह का मानना है कि वेदांता की डिलिस्टिंग कंपनी के कॉर्पोरेट सिम्पलीफिकेशन की कोशिशों का अगला पड़ाव है। ऐसा होने से कंपनी के कारोबार को अधिक बेहतर तरीके से चलाया जा सकेगा।












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