7th Pay Commission: वेतन बढ़ोत्तरी के फैसले में देरी कर के सरकार ने बचाए 26,000 करोड़ रुपए
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार के जो कर्मचारी सातवें वेतन आयोग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें यह खबर बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगेगी। सरकार ने सैलरी में बढ़ोत्तरी करने की तारीख को आगे बढ़ाकर अपने करीब 26,000 करोड़ रुपए बचा लिए हैं। केन्द्र सरकार के कर्मचारी इसी खबर को लेकर कंफ्यूजन में हैं कि आखिर न्यूनतम बैसिक सैलरी में बढ़ोत्तरी कब से होगी। यह माना जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला जानबूझ कर किया है, ना कि किसी मजबूरी की वजह से। सरकार न्यूनतम सैलरी में बढ़ोत्तरी के फैसले को काफी पहले ही लागू कर चुकी होती, लेकिन बाद में सरकार ने यह फैसला किया कि अभी पैसे बचाने चाहिए।

कितने पैसे बचाए सरकार ने?
सरकार केन्द्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोत्तरी के फैसले को काफी समय से लगातार टाल रही है। इस तरह से सरकार अभी तक करीब 26,000 करोड़ रुपए बचाने में सफल हो गई है। पहले यह बात सामने आई थी कि सैलरी में बढ़ोत्तरी के फैसले को जनवरी 2018 से लागू किया जाएगा। हालांकि, अब इसमें देरी किए जाने की खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि सरकार अब इस फैसले को तीन महीने देरी यानी 1 अप्रैल 2018 से लागू करेगी। इस तरह से सरकार और अधिक पैसे बचाने में सफल हो सकेगी।

तो फिर कब से होगी सैलरी में बढ़ोत्तरी?
कुछ रिपोर्ट कहती हैं कि सरकार 1 जनवरी 2018 से ही सैलरी में बढ़ोत्तरी कर सकती है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्ट यह दावा कर रही हैं कि सरकार इसे 3 महीने और देरी से यानी 1 अप्रैल 2018 से लागू करेगी। अभी इस फैसले को लागू करने से पहले दो औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। पहली तो ये कि अभी एनएसी की बैठक होनी बाकी है और दूसरी ये कि इस बैठक के बाद रिपोर्ट को एक्सपेंडिचर विभाग को भेजनी है। जितनी जल्दी ये औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी, उतनी ही जल्दी वेतन में बढ़ोत्तरी का फैसला लागू कर दिया जाएगा।

ये है 26,000 करोड़ बचाने का गणित
एक सामान्य गणित के हिसाब से यह देखा जा रहा है कि सरकार वेतन बढ़ोत्तरी के फैसले में देरी कर के हर महीने प्रति व्यक्ति करीब 3000 रुपए बचा रही है। अगर सभी 48 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों को ध्यान में रखते हुए कैल्कुलेशन की जाए तो 18 महीने की देरी का मतलब है कि सरकार ने करीब 26,000 करोड़ रुपए बचा लिए हैं।












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