7th pay commission: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, इन कर्मचारियों के लिए बदला 27 साल पुराना नियम
सरकार का बड़ा फैसला,बदला 27 साल पुराना नियम
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने 7th Pay Commission की बढ़ोतरी से पहले ही ब्यूरोक्रेट को बड़ी राहत दी है। केंद्र सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए 27 साल पुराने नियम में बदलाव किया है। इस बदलाव का असर ब्यूरोक्रेट्स के निवेश पर होगा। सरकार ने ब्यूरोक्रेट के लिए शेयर बाजार में निवेश के 27 साल पुराने नियम को बदल दिया है। सरकार ने 1992 में बने इस नियम को बदलकर ब्यूरोक्रेट के निवेश की सीमा को बढ़ा दी है। इस नए नियम के बाद अब ग्रुप A और B के अधिकारियो के शेयर, डिबेंचर या म्यूचुअल फंड में निवेश की सीमा को 5 गुना बढ़ा दिया है। पहले जहां अधिकारियों को शेयर बाजार, डिबेंचर और म्यूचुअल फंड में 50 हजार रुपए से अधिक के निवेश पर केंद्र सरकार को सूचित करना पड़ता था, लेकिन अब उनकी इस सीमा को 5 गुना तक बढ़ा दिया गया है। वहीं ग्रुप C और D स्तर के अधिकारियों के लिए यह सीमा 25 हजार रुपए कर दी गई है।

निवेश की सीमा बढ़ी
नए नियम के बाद ये अधिकारी शेयर बाजार में अधिक निवेश कर सकेंगे। अब उनके निवेश की सीमा बढ़ गई है। नए नियम के बाद ग्रुप ए और बी स्तर के अधिकारी 6 महीने की अपनी बेसिक सैलरी शेयर बाजार में लगा सकेंगे। दरअसल 7वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों और अधिकारियों की सैलरी में बढ़ोतरी होने से सरकार ने निवेश की सीमा को बढ़ा दिया है। यहां खास बात ये कि अधिकारियों को निवेश की सीमा बढ़ने के बाद भी सरकार को निवेश के बारे में जानकारी देनी होगी।

सरकार को करना होगा सूचित
केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक अगर कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपने दो माह से अधिक का बेसिक सैलरी शेयर बाजार में निवेश करता है तो उसे इसकी जानकारी अपने विभाग को देनी होगी।

केंद्रीय कर्मचारियों की मांग
आपको बता दें कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 18000 रुपए तय की गई है। कर्मचारी इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। केंद्रीय कर्मचारियों की मांग है कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 26000 रुपए की जाए। माना जा रहा है कि सरकार लोकसभा चुनाव की तारिखों से ऐलान से पहले वेतन बढ़ोतरी की घोषणा की जा सकती है।












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