नेपाल में 3 साल की बच्ची बनी नई 'जीवित देवी', जानिए कैसे होता है बच्चियों का चयन
काठमांडू। नेपाल में सदियों से जीवित देवी की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। हाल में काठमांडू में तीन वर्षीय तृष्णा शाक्या को नेपाल की नई 'जीवित देवी' का दर्जा दिया गया है। उन्हें पूरे साज-सज्जा के साथ डोली में बिठाकर घर से कुमारी मंदिर में लाया गया। जीवित देवी को नेपाल में कुमारी भी कहा जाता है। जानिए कौन होती हैं कुमारी और कैसे होता है इनका चयन...


कष्टों से बचाती हैं जीवित देवी
नेपाल में कन्या को ईश्वर का अवतार मान कर उनकी पूजा करने की परंपरा काफी पुरानी है। कुमारी को नेपाल में देवी माना जाता है और इन्हें एक विशेष मंदिर में रख इनकी पूजा की जाती है। लोगों का मानना है की कुमारी उन्हें सभी तरह के कष्टों से बचाकर उनकी आजीवन रक्षा करेंगी। कन्या को तब तक कुमारी माना जाता है जब तक ये इन्हें मासिक धर्म शुरू नहीं होता। इसके बाद किसी और कन्या का चयन कर उसे कुमारी बनाया जाता है।

कड़ी चुनौतियों के बाद चुनी जाती है देवी
कुमारी का चुनाव करना कोई आम बात नहीं है। इसके लिए उनकी कठिन परीक्षा होती है। कन्याओं की जन्म-कुंडली से लेकर उनका आचरण, इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुमारी के चयन की कड़ी परीक्षा में उनके सामने भैंसे के कटे सिर से लेकर राक्षस बने लोग तक रखे जाते हैं। जो कन्या इन सबसे नहीं डरती, उसे कुमारी का दर्जा दिया जाता है।

साल में केवल 13 बार निकलती हैं बाहर
कुमारी के चयन के बाद उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ता है। उन्हें कुमारी में रखा जाता है और यहीं उनकी सारी दीक्षा-शिक्षा होती है। कुमारी को साल में केवल 13 बार मंदिर से बाहर निकलने की इजाजत मिलती है। बाहर निकलते वक्त भी उन्हें खास ध्यान देना पड़ता है क्योंकि कुमारी के पांव जमीन पर नहीं पड़ने चाहिए। (प्रतिकात्नक तस्वीर)

देवी लेकिन फिर भी नहीं करता कोई शादी
कुमारी के व्यस्क होने के बाद उनकी जिंदगी आसान नहीं होती। पुरानी मान्यताओं और कहानियों के अनुसार जो आदमी कुंवारी रह चुकी लड़की से शादी करता है, उसकी जिंदगी कम हो जाती है। इस कारण पुरूष इनसे शादी करने के लिए तैयार नहीं होते। (प्रतिकात्मक तस्वीर)












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