ऑन ड्यूटी शराब पीकर टल्ली हो गया कर्मचारी, नौकरी से निकाला, तो कंपनी को देने पड़े 32 लाख रुपये
शख्स ने काम के दौरान इतनी शराब पी ली, कि वो बेसुध हो गया। कंपनी ने उसे काम से निकाल दिया लेकिन कोर्ट में केस जीतने के बाद कंपनी को उसे 32 लाख रुपये देने पड़े।
शराब की लत कितनी बुरी होती है, इस बात में कोई दोराय नहीं है। अकसर शराब के कई मामले आपने सुने या देखे होंगे, जिसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन आयरलैंड के एक शख्स के साथ कुछ अलग ही मामला देखने को मिला है। शख्स ने काम के दौरान इतनी शराब पी ली, कि वो बेसुध हो गया और फिर उसके साथी कर्मचारी को उसे घर छोड़ना पड़ा। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये मामला यहीं नहीं थमा और कोर्ट तक पहुंच गया। इसके बाद जो हुआ, वो अपने आप में काफी हैरान कर देने वाला है।

आयरलैंड का है मामला
ये मामला है, आयरलैंड के बगेनलस्टाउन शहर के Connolly's Supervalu सुपरमार्केट का। जहां शराब की लत के शिकार ईमोन मर्फी को यहां का इंचार्ज बनाया गया था। भले ही इससे पहले शराब के कई मामले सामने आए थे, लेकिन ईमोन काम के वक्त काफी डिसिप्लिंड रहते थे।

शराब पीकर धुत हो गया मर्फी
डेली स्टार की खबर के मुताबिक, फिर एक दिन स्टोर के मालिक बाहर गए थे, तो मर्फी ने काम के दौरान इतनी शराब पी ली, कि वे बेसुध ही हो गए। उनकी ये हरकत पता लगने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। ज्यादा मात्रा में वोडका पीने के कारण वे बेसुध हो गए थे।

होश में नहीं थे मर्फी
मर्फी के वकील हेलेन बैरी बताते हैं कि वे होश में नहीं थे, जिसके बाद स्टाफ के अन्य लोग उन्हें घर लेकर आए। इसके बाद कंगनी ने मर्फी को हरकत को हद से ज्यादा ब्रीच ऑफ ट्रस्ट बताया।

अचानक कंपनी ने निकाला
Irish Independent की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायनिर्णायक अधिकारी माइकल मैकएंटी ने ट्रिब्यूनल कोर्ट में इस बात को माना कि मर्फी की शराब की लत एक डिसेबिलिटी के तौर पर ट्रीट की गई थी। मर्फी को ऐसे अचानक कंपनी से निकाल दिया गया था।

18 हफ्ते रहना पड़ा बेरोजगार
अचानक कंपनी से निकाले जाने के बाद मर्फी को तकरीबन 18 हफ्ते तक बेरोजगार रहना पड़ा था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई सैलरी में उन्हें करीब 23 लाख रुपये मिलते हैं। अब इस बीच बिना नौकरी के उन्हें करीब 85 लाख रुपये का नुकसान भुगतना पड़ा था।

कंपनी को देने पड़े 32 लाख रुपये
मामले में मर्फी के पक्ष में फैसला सुनाया गया और पुरानी कंपनी को करीब 32 लाख रुपये का हर्जाना देने का फैसला सुनाया गया।












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