राजस्थान में मिले खास तरह के डायनोसोर के अवशेष, 167 मिलियन साल पुराने फॉसिल बने मिस्ट्री
Oldest fossil of Dinosour: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-रुड़की और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के वैज्ञानिकों ने राजस्थान के जैसलमेर में लंबी गर्दन वाले और पौधे खाने वाले खास तरह के डायनासोर के सबसे पुराने जीवाश्म अवशेषों की खोज की है।
167 मिलियन साल पुराने हैं अवशेष
'साइंटिफिक रिपोर्ट्स' में प्रकाशित अध्ययन से ये पता चलता है कि अवशेष 167 मिलियन वर्ष पुराने हैं। साथ ही इसके जरिये ये जानकारी भी सामने आई है कि ये नई प्रजाति के हैं, जो अब तक वैज्ञानिकों के लिए अज्ञात हैं।

जीवाश्म का अध्ययन जारी
वर्तमान में आईआईटी-रुड़की के पृथ्वी विज्ञान विभाग में वर्टेब्रेट पेलियोन्टोलॉजी के चेयर प्रोफेसर और इंस्टीट्यूट पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) लखनऊ के पूर्व निदेशक सुनील बाजपेयी और उनके आईआईटीयन सहयोगी बीरबल साहनी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर इस जीवाश्म के बारे में पढ़ा।
बीएसआईपी के पूर्व निदेशक क्या बोले?
जीएसआई द्वारा 2018 में राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में मध्य जुरासिक (~ 167 Ma) चट्टानों में शुरू किए गए एक व्यवस्थित जीवाश्म अन्वेषण और उत्खनन कार्यक्रम ने इस खोज को जन्म दिया है। बीएसआईपी के पूर्व निदेशक सुनील बाजपेयी ने कहा कि जीवाश्मों को जीएसआई अधिकारी कृष्ण कुमार, प्रज्ञा पांडे और त्रिपर्णा घोष ने देबासिस भट्टाचार्य की देखरेख में एकत्र किया था और फिर हमने लगभग पांच सालों तक उनका अध्ययन किया।
चिली में भी मिले थे अवशेष
बताते चलें कि इसी साल के जनवरी माह में अर्जेंटीना की सीमा के पास दक्षिणी चिली में भी डायनोसोर की प्रजाति के अवशेष मिले थे। ये अवशेष पहली बार वहां पाए गए थे, जिसके बाद चर्चा का बाजार ही गर्म हो गया। शोधकर्ताओं ने रिसर्च को लेकर कहा कि एक दुर्गम घाटी में डायनोसोर के ये चार प्रजातियों के अवशेष पाए गए हैं।
गुजरात में भी मिल चुके जीवाश्म
वहीं भारत की बात की जाए तो ये पहली बार नहीं है जब देश में डायनोसोर के अवशेष मिले हों। इससे पहले भी गुजरात के कच्छ जिले में डायनोसोर के अवशेष मिलने के बाद ये चर्चा का विषय बन गया था। इस रिसर्च ने वैज्ञानिकों के कई सवालों को हल कर दिया।












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