साइबेरिया में हुआ प्लेन क्रैश, जिंदा बचे शख्स को जंगल में मिली ऐसी चीज जिसे खाकर 10 दिनों तक रहा जीवित
नई दिल्ली, 08 जुलाई: एक कहावत है कि, 'जाको राखे साइयां मार सके ना कोई' रूस के एक शख्स पर एक दम सटीक बैठती है। प्लेन क्रैश में बुरी तरह घायल हुआ शख्स 10 दिनों तक साइबेरिया के उप आर्कटिक जंगलों में खूंखार जानवरों से खुद को सुरक्षित रख जान बचाने में सफल रहा। डेलीस्टार की रिपोर्ट के अनुसार, पावेल क्रिवोशापकिन An-2 प्लेन क्रैश में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। प्लेन क्रैश में जीवित बचे इस व्यक्ति को 10 दिनों के बाद रेस्क्यू किया गया। इसका जिंदा बचना एक चमत्कार माना जा रहा है।

साइबेरिया के जंगलों में क्रैश हुआ प्लेन
रिपोर्ट के मुताबिक, 36 वर्षीय पावेल क्रिवोशापकिन चांदी के खनन का काम करते हैं। इसी दौरान उनका एनटोव-2 प्लेन साइबेरिया के उप आर्कटिक जंगलों में क्रैश हो गया। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए गया। इसके बाद वह रूस के जंगलों में दस दिन तक अकेले रहे। गंभीर तौर पर घायल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं खोई। जिसके चलते उसने खुद को 10 कठिन दिनों के दौरान नूडल्स खाकर रखा। उन्हें ये नूडल्स एक झोपड़ी में मिले थे।
फोटो साभार: Twitter/Social Media

भालुओं और भेड़ियों के बीच जान बचाकर घूमता रहा शख्स
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस इलाके में पावेल का प्लेन क्रैश हुआ था। वह इलाका जंगली भूरे भालुओं और भेड़ियों से घिरा हुआ है। पावेल जिस प्लेन क्रैश में जिंदा बचे थे, उस प्लेन के पायलट और को-पायलट जिंदा ही जल गए थे। पावेल ने बताया कि वह शायद इसलिए बच गए क्योंकि वह प्लेन के पिछले हिस्से में थे। इस हिस्से में 1 टन से भी अधिक खाना और चांदी के खनन सम्बंधी उपकरण रखे हुए थे। रेस्क्यू टीम ने उन्हे 1 जुलाई को रूस के याकुतिया इलाके से बचाया था।

विमान जल गया लेकिन शख्स जिंदा बच गया
रेस्क्यू कर अस्पताल लाए गए पावेल ने बताया कि, उनका विमान कोहरे भरे मौसम में उड़ान भर रहा था। इसी दौरान वह एक पहाड़ी से टकरा जाता है। जब मुझे होश आया तो मेरे चारों ओर धुंआ फैला हुआ था। मुझे विमान से बाहर निकलने के लिए दरवाजे का लॉक तोड़ना पड़ा। विमान के टुकड़े अभी भी जल रहे थे। मैं लगभग तीन घंटे तक विमान के बगल में बैठा रहा, फिर धीरे-धीरे नदी के किनारे चलने लगा।

दक्षिण कोरियाई नूडल्स ने बचाई जान
नदी के किनारे मैं हिरन द्वारा बनाए गए रास्ते पर चलते हुए एक झोपड़ी तक पहुंच गया, जहां झोपड़ी में मुझे दक्षिण कोरियाई नूडल्स के कई पैकेट मिले।। यही खाकर 10 तक पावेल खुद को जिंदा रखने में सफल रहा। उन्होंने कई बार हेलीकॉप्टरों की आवाज सुनी और वह लगातार बचाव के लिए झंडा दिखाते रहे लेकिन किसी का ध्यान उन पर नहीं गया। पावेल ने बताया कि, हर दिन मैं एक झंडा लहराते हुए बाहर जाता था, इस उम्मीद में कि कोई मुझे देख लेगा। आखिर में दसवें दिन बचाव दल की टीम में शामिल पोलर एयरलाइंस एमआई -8 हेलीकॉप्टर ने देखा और अपने साथ ले आए।

कई दिनों तक झोपड़ी में छुपा रहा पावेल
लगभग 7,000 वर्ग मील में फैले इलाके में प्लेन क्रैश के बाद जिंदा बचे लोगों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था। पोलर एयरलाइंस एमआई -8 हेलीकॉप्टर के बचाव दल ने सबसे पहले याकुतिया के कोबायस्की जिले में विमान का मलबा और दो पायलटों के जले हुए शवों को देखा। करीब एक घंटे बाद वह लोग पावेल को भी खोजने में सफल रहे। उनके विमान ने यूएस-खतिंग से वर्टिकलनिय स्थित चांदी की खदान के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन जल्दी ही रडार से गायब हो गया।

प्लेन चांदी की खदान के लिए जा रहा था
फ्लाइट एक दूरस्थ चांदी की खदान और भूवैज्ञानिक अन्वेषण स्थल पर वर्कर्स के लिए भोजन और अन्य साजो-सामान की आपूर्ति करने जा रही थी। पावेल रूस के जिस याकूतिया इलाके में मिले थे, वहां तापमान सर्दियों में माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। गर्मियों में यहां दिन का तापमान 18 डिग्री और रात के तापमान में 10 डिग्री तक की गिरावट हो जाती है।












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