ना ना! ये इंसान तो नहीं... छोटी सी बच्ची ने 6 फीट के आदमी को मारा जोरदार धक्का, क्या शरीर में घुसी थी आत्मा?
ये कहानी है 7 साल की एक लड़की की। जिसकी जिंदगी उस एक रात के बाद पूरी तरह से बदल गई, जब उसने 6 फुट के आदमी को इतना जोरदार धक्का मारा कि वो दूर जा गिरा।

क्या आप पैरानॉर्मल गतिविधियों पर भरोसा करते हैं? क्या आपको भी लगता है कि किसी आत्मा के वश में होने की बातें सच होती हैं? अगर इन सब बातों का जवाब हां है तो आपको ये कहानी जरूर पढ़नी चाहिए।
उस रात के बाद सब बदल गया...
ये कहानी है एक महिला की, जिसने अपनी बेटी की ऐसी दास्तां शेयर की है, जिसे जानने के बाद आप हैरान हो जाएंगे। महिला ने बताया कि पहले तो परिवार ने इस बात खारिज कर दिया लेकिन एक घटना ने सबका विश्वास हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।
लोगों को नहीं हुआ यकीन
हम्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने ये कहानी अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर की है। लड़की की पहचान छिपाई गई है। कई लोगों ने महिला के इस दावे को मनगढ़ंत बताया तो कईयों का मानना था कि ये किसी बॉलीवुड फिल्म की तरह लग रही है। वहीं कईयों ने कहा कि बिना किसी सबूत के सोशल मीडिया पर ऐसी बातें क्यों फैलाई जा रही हैं?
बेटी जोर जोर से हिलने लगी
ये सब तब शुरू हुआ, जब पूरा परिवार साथ बैठकर फिल्म देख रहा था और अचानक बेटी गिर पड़ी और हिलने लगी। सबको लगा कि उसे दौरा पड़ा है और वे उसे हॉस्पिटल ले जाने की तैयारी करने लगे। एक पड़ोसी ने कहा कि वो उसे लेकर जाएगा लेकिन जैसे ही वे उसे उठाने लगे बच्ची ने उसे जोरदार धक्का दिया और वो धड़ाम से नीचे जा गिरा।

बच्ची ने 6 फुट के आदमी को दिया धक्का
इतनी छोटी बच्ची का इतना जोरदार धक्का मारना बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं था। इसके बाद पड़ोसी ने कहा कि ये कुछ और है। महिला बताती हैं कि बेटी के शरीर से उसे बाहर निकालने में 6 साल लग गए। ये सब तब शुरू हुआ, जब वो 7 साल की थी। महिला कहती हैं कि सोचिये कि 7 साल की लड़की किसी 6 फुट के आदमी को धक्का दे रही है।
उस रात के बाद पड़ोसी ने कहा कि तुम्हारी बेटी के अंदर जो ताकत थी, वो इंसान की नहीं थी। मुझे लगा जैसी मेरी सांस ही थम गई।
चिड़चिड़ी सी रहने लगी बच्ची
कई लोगों ने तो इसे महज एक अंधविश्वास बताकर खारिज कर दिया। लेकिन हमें क्या पता था कि इसके बाद सब कुछ बदल जाएगा। बच्ची उस दिन के बाद से काफी चिड़चिड़ी सी रहने लगी। जब हम मंदिर जाते तो वो गुस्सा करती थी। अंदर प्रवेश करने पर उसकी आंखें लाल रहने लगीं। पहले मैं काफी डर गई इसके बाद मैंने पूछा तुम कौन हो? वो फर्राटेदार गुजराती बोलने लगी। जबकि उसे गुजराती आती ही नहीं थी।
सामने आई बच्ची के अजीब बर्ताव की वजह
उसकी आवाज लड़के सी हो गई। इस परेशानी का कोई समाधान नहीं था। हमें 6 सालों तक ऐसे ही रहना पड़ा। बाद में पता चला कि जिस पार्क में बच्ची जाती थी, वहां पर एक कब्रिस्तान भी था। सोशल मीडिया पर पहचान छुपाने को लेकर लोगों ने कहा कि इस घटना का कोई सबूत नहीं है। ऐसे में ये मनगढ़ंत भी हो सकती है। कुछ तो सबूत दिया जाना चाहिए। लेकिन इस पेज को सच्ची कहानियों को पोस्ट करने के लिए जाना जाता है।
पेज ने दिया स्पष्टीकरण
इस पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने कहा, कृपया ध्यान दें। ये बॉम्बे के निवासी द्वारा हमारे लेखक को सुनाई गई सच्ची कहानी है। हालांकि, कई कारण थे जिसकी वजह से उनकी पहचान जाहिर नहीं की जा सकती थी।












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