महज 3 वर्ष की आयु और मिलेगी पीएचडी की मानद उपाधि
गुड़गांव। प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती है और वह खुद बखुद दुनिया के सामने आ जाती है। गुड़गांव के तीन वर्षीय विभोर की प्रतिभा का लोहा दुनिया ने माना है और उन्हें महज तीन वर्ष की आयु में पीएचडी की मानद उपाधि प्रदान की जा रही है जो कि अपने आप में विश्व रिकॉर्ड है।[5 साल की बच्ची का यह कारनामा देखकर आप दंग रह जायेंगे]
विभोर की उम्र महज तीन वर्ष है और उसने अभी स्कूल भी जाना शुरु नहीं किया है वह सिर्फ कुछ देर के लिए प्लेवे स्कूल जाता है। लेकिन विशोर को 20 तक का पहाड़ा याद है और वह इसे बिना रुके सुना सकता है। इसी असाधारण प्रतिभा के चलते वर्ल्ड रिकॉर्ड एकेडमी ने विभोर को पीएचडी की मानद उपाधि से नवाजने का फैसला लिया है।
महज 3 वर्ष की आयु में गजब प्रतिभा
विभोर को अगस्त के माह में एशिया रिकार्ड बुक और इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में सबसे कम उम्र में 20 तक का पहाड़ा सुनाने के चलते यह सम्मान दिया जाएगा। वहीं विभोर के पिता और माता दोनों ही कंप्यूटर इंजीनियर हैं उनका कहना है कि हम बच्चे को खेलने के लिए लैपटॉप दे दिया करते थे।
मां की स्पेलिंग मिस्टेक सुधारता है
विभोर लैपटॉप के जरिए दुनियाभर की जानकारियां बटोरता है। यही नहीं उनका कहना कि विभोर मेरी स्पेलिंग मिस्टेक को भी सुधारता है। वहीं विभोर के नाना उसे चलता-फिरता कंप्यूटर कहते हैं।
विभोर का जन्म 24 अप्रैल 2012 को हुआ था और उसने महज छह मिनट 18 सेकेंड में 20 तक का पहाड़ा सुनाकर एशिया बुक ऑफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। यही नहीं 10 जनवरी 2015 को विभोर का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में भी दर्ज हो चुका है।
दुनिया के हर देश पहचानता है विभोर
इसके अलावा विभोर 500 से ज्यादा शब्दों की स्पेलिंग जानता है। हिंदी, अंग्रेजी, रोमन और स्पेनिश भाषाओं में एक हजार तक की गिनती भी विभोर को आती है। दुनिया के मैप पर किसी भी देश को पहचान लेता है और 30 से अधिक जानवरों की आवाज निकाल लेता है। यही नहीं यूएस के हर राज्य को विभोर मैप पर बता सकता है।













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