VIDEO: ग्रामीणों को आई अजीबोगरीब आवाज, 30 फीट गहरे कुएं में फंसा था खूंखार शिकारी
Leopard video: कई बार जानवर ऐसी दर्दनाक परिस्थितियों में फंस जाते हैं, जिससे बाहर निकालने वाला कोई नहीं होता। ऐसे में बेजुबान जानवरों की मदद करना हर इंसान का कर्तव्य हो जाता है। बात चाहे शिकारी जानवरों की हो या फिर शाकाहारी जीवों की।
हाल ही में एक तेंदुए को ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा, जब वो जुन्नार के ओटूर वन रेंज में स्थित निमगांव सावा गांव में 30 फुट गहरे खुले कुएं में जा फंसा। लेकिन गनीमत रही कि वन्यजीव एसओएस और महाराष्ट्र वन विभाग की नजर इस तेंदुए पर पड़ी और इसका रेस्क्यू किया गया।

वन विभाग की टीम ने तेंदुए का रेस्क्यू कर इसे सुरक्षित जंगल में वापस छोड़ दिया। दरअसल, निमगांव सावा गांव के निवासी ने कुएं से एक अजीबोगरीब आवाज सुनी। फिर नजदीक जाकर देखा कि 30 फुट गहरे कुएं से बाहर निकलने के लिए एक तेंदुआ संघर्ष कर रहा है। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत महाराष्ट्र वन विभाग को इस घटना के बारे में सूचित किया।
इसके बाद वन अधिकारियों की मदद के लिए वन्यजीव एसओएस मानिकदोह तेंदुआ बचाव केंद्र की एक बचाव टीम को भी बुलाया गया था। रस्सियों और जाल के पिंजरे जैसी चीजों से लेकर गियर तक साथ में लिए टीम तुरंत ही घटनास्थल पर पहुंची। स्थिति का आकलन करने के बाद एनजीओ की टीम और वन विभाग के कर्मियों ने एक प्लान बनाया।
इस प्लान के तहत पिंजरे को सावधानीपूर्वक कुएं में उतारा गया। शुरुआत में तो घबराया तेंदुआ झिझक रहा था लेकिन बाद में आखिरकार वो पिंजरे में चढ़ गया और फिर उसे सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। वाइल्डलाइफ एसओएस पशुचिकित्सक ने मौके पर उसका चेकअप किया और तेंदुए को रिहाई के लिए वन विभाग को सौंप दिया।
वन्यजीव एसओएस के पशु चिकित्सक अधिकारी डॉ चंदन सावने ने कहा कि एक बार तेंदुए को कुएं से बाहर निकालने के बाद हमने साइट का मूल्यांकन किया। तेंदुआ लगभग 9-10 साल का वयस्क नर था। उसके शरीर पर काफी खरोचें थीं। हमने उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर तुरंत वन विभाग को सौंप दिया।
ओटूर वन रेंज के रेंज वन अधिकारी वैभव काकाडे ने कहा कि घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। इस वजह से रेस्क्यू में टाइम लग गया। लगभग 5 घंटे लगे। लेकिन हमारे स्टाफ और वाइल्डलाइफ एसओएस टीम की कोशिश से तेंदुए को सफलतापूर्वक बचा लिया गया।
यहां देखें वायरल वीडियो...
वाइल्डलाइफ एसओएस के को-फाउंडर और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि ऐसे बचाव के दौरान समय बहुत जरूरी होता है। क्योंकि अकसर कुओं के अंदर गिरने वाले तेंदुए काफी थकान और थकावट से घिरे होते हैं। खुले कुएं अभी भी तेंदुए जैसे जंगली जानवरों के लिए खतरा बने हुए हैं। लेकिन ग्रामीणों और वन विभाग जैसे कई हितधारकों के सहयोगात्मक प्रयास के कारण यह बचाव अभियान सफलतापूर्वक चलाया जा सका।












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