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कोरोना महामारी में सेक्स को लेकर दिलचस्पी क्यों कम हुई?

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अमेरिका के टेक्सस की एक सेक्स थेरेपेस्टि एमिली जेमिया कहती हैं कि कोविड महामारी से पहले कई जोड़े "हर रात पास से गुज़रने वाले दो समुद्री जहाज़ की तरह थे."

घर के बाहर अपने अपने कामों में व्यस्त रहने वाले कई पार्टनर्स के लिए लॉकडाउन राहत की तरह आया.

घर पर रहने के कारण उन्हें इतमीनान से साथ बैठने का और एक दूसरे से साथ वक़्त गुज़ारने का मौक़ा मिला.

जेमिया के मुताबिक, "शुरुआत में महामारी ने लोगों को एक दूसरे से जुड़ने का मौका दिया, उसी तरीक़े से जैसे वो पहले छुट्टियों में मिला करते थे."

लेकिन जैसे-जैसे महामारी बढ़ती गई, इसका बुरा असर भी दिखने लगा, ख़ासतौर पर शारीरिक संबंधों में. उनके मुताबिक़, "ज्यादातर जोड़ों में सेक्स की इच्छा कम हो गई."

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क्या पूरी दुनिया में ऐसा ही हुआ?

दुनिया भर में की गई स्टडी ऐसी की कहानियां बयां करती हैं.

शोधकर्ताओं ने तुर्की, इटली, भारत और अमेरिका में 2020 में पाया कि अपने पार्टनर के साथ या किसी के साथ एक बार होने वाले सेक्स में कमी आई और इसका सीधा संबंध लॉकडाउन से है.

अमेरिका की किन्से इंस्टिट्यूट जहाँ ये स्टडी हुई, वहाँ के रिसर्च फ़ेलो जस्टिन लेहमिलर के मुताबिक़, "मुझे लगता है कि इसकी एक बड़ी वजह थी कि कई लोग परेशान थे."

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कई लोगों के अंदर महामारी और लॉकडाउन ने डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया. कई लोगों में अपने स्वास्थ्य से जुड़ी एंग्ज़ाइटी देखने को मिली, पैसे को लेकर अनिश्चितता थी और ज़िंदगी में कई और बदलाव हो रहे थे.

इन चीज़ों के कारण होने वाली परेशानियों के साथ-साथ अपने पार्टनर के साथ ज़्यादा समय बिताना, वो भी बंद कमरे में, इससे रिश्तों पर बुरा असर पड़ा और सेक्स में कमी आई.

एक तरीक़े से कोविड महामारी सेक्स के लिए बहुत ख़राब साबित हुई है. लेकिन क्या हम पुराने रिश्तों की तरफ़ वापस जा पाएंगे या फिर ये असर लंबे समय के लिए पड़ा है?

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सेक्स को लेकर इच्छा में कमी

जैसा कि जेमिया ने कहा कि शुरू में कई जोड़े लॉकडाउन के दौरान सेक्स लाइफ का मज़ा ले रहे थे.

टेक्सस विश्वविद्याल में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर और सोशल साइकोलॉजिस्ट रोएंडा बल्ज़ारिनी के मुताबिक़ ये उनके लिए किसी "हनीमून" पीरियड की तरह था, लोग तनाव को बेहतर तरीक़े से झेल रहे थे.

वो कहते हैं, "इस दौरान लोगों ने साथ मिलकर काम किया. हो सकता है इसमें अपने पड़ोसी को टॉइलट पेपर देना शामिल हो."

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"लेकिन समय के साथ संसाधन कम होते गए, लोगों में तनाव बढ़ गया, उनकी ताक़त कम होने लगी, निराशा और अवसाद बढ़ने लगा. जब ये सब होने लगा तो दो लोगों के बीच रिश्तों में भी बदलाव आने लगे."

बल्ज़ारिनी के मुताबिक़ उनके और उनके एक साथी द्वारा की गई एक स्टडी जिसमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के 57 देशों के लोगों शामिल थे,उसमें ये बातें सामने आईं.

बल्ज़ारिनी के मुताबिक़ उन्होंने पाया कि महामारी की शुरुआत में आर्थिक मोर्चे पर चिंताओं ने यौन इच्छाओं को बढ़ावा दिया.

लेकिन धीरे धीरे लोग महामारी से जुड़े तनाव जैसे कि अकेलापल या आम तनाव या कोविड-19 से जुडे तनाव से ग्रस्त रहने लगे, इसके कारण उनकी यौन इच्छाओं में कमी आने लगी.

बहुत ज़्यादा साथ रहना

बल्ज़ारिनी के मुताबिक कई जोड़ों ने बताया कि वो दिन में साथ नहाने या तैरने जाते थे, लेकिन समय के साथ 'नार्मल से हटकर किया जाना' वाला ये व्यवहार भी ख़त्म हो गया.

जोड़ों के बीच एक दूसरे से उम्मीदें बढ़ गईं, वो एक दूसरे की छोटी छोटी गलतियां निकालने लगे.

लेहमिलर इसे "ज़्यादा साथ रहने का असर" बताते हैं जिसके कारण "आपकी छोटी छोटी हरकतें आपके पार्टनर को परेशान करती हैं."

बलज़ारियन के मुताबिक उन्हें याद है कि किसी ने उन्हें बताया था कि लॉकडाउन से पहले उन्हें इस बात का एहसास ही नहीं था कि उनका पार्टनर खाना खाते समय मुंह से कितनी तेज़ आवाज़ निकालता है.

बहुत ज़्यादा साथ में रहने के कारण सेक्स की इच्छा भी कम हो गई.

लेहमिलर कहते हैं,"लंबे समय साथ रहने के पीछे एक ब़ड़ी वजह होती है कि आपको अपने पार्टनर के बारे में सब कुछ नहीं पता होता और आप बहुत राज़ जानना चाहते हैं."

"लेकिन जब आप दिन भर एक दूसरे को देख रहे हैं, तो जानने की ये इच्छा ख़त्म होने लगती है."

इसके अलावा इतने दिनों तक महामारी के बीच रहने के कारण लोगों के अंदर बदलाव आ जाते हैं, वो पहले की तरह नहीं रह जाते, इसका असर सेक्स को लेकर कॉनफ़िडेंस और परफ़ॉर्मेंस पर पड़ता है.

महिलाओं को ख़ासतौर पर इस दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि ऑफिस के अलावा उन्हें घर के काम, बच्चों का ख्याल और घर से चलने वाले बच्चों के क्लास का भी ख्याल रखना पड़ा.

जेमिया के मुताबिक, "महिलाओं के लिए ये बहुत मुश्किल समय था. करियर पहचान का एक अहम हिस्सा है, और सबुकछ एक बेडरूम में सिमट गया. अचानक , जैसे समझ में ही नहीं आ रहा था कि हम कौन हैं."

क्या सब कुछ पहले जैसा हो पाएगा?

इन तमाम बातों के बावजूद, सेक्स ख़त्म नहीं हो गया है.

किन्से इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं के मुताबिक़ इस दौरान एक अच्छी बात ये हुई है कि लोगों ने बेड में कुछ नई चीज़े करने की कोशिश शुरू की.

लेहमिलर के मुताबिक, "लोगों ने नई चीज़ों के साथ कोशिश की जिससे सुधार हुआ."

इन नई कोशिशों में "नए पोज़िशन, फैंटेसी" जैसी चीज़ें शामिल थीं.

लेकिन जिन लोगों के बीच यौन संबध ख़राब हो चुके हैं और अभी तक ठीक नहीं हुए, क्या वो भविष्य में ठीक होंगे?

लेहमिलर कहते हैं कि कुछ लोग इससे उबर जाएंगे, लेकिन कुछ के साथ ऐसा नहीं होगा. "क्योंकि दोनों के बीच काफ़ी दिनों के कनेक्शन टूट गया है."

उनके शोध में ये पता चला है कि कई लोगों इस दौरान अपने पार्टनर को धोखा भी दिया, जो कि रिश्तों के लिए ख़राब साबित हो सकता है. इसके अलावा कई लोग महामारी के कारण नौकरी खोने और आर्थिक कारणों से परेशान रहेंगे जिसका असर रिश्तों पर पड़ेगा.

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