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इंसानों ने केकड़ों को दी बड़ी 'टेंशन', इस वजह से संबंध बनाने को तेजी से हो रहे उत्तेजित

लंदन: दशकों से प्लास्टिक कचरा दुनिया के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है, लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकला। जमीन के साथ-साथ ये समुद्र में रह रहे जीवों को भी काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है, जिसको लेकर अब एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर जल्द प्लास्टिक कचरे को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में मुश्किल खड़ी हो सकती है। (तस्वीरें- सांकेतिक)

यौन उत्तेजना का शिकार

यौन उत्तेजना का शिकार

एक नई रिसर्च के मुताबिक समुद्र में प्लास्टिक की मात्रा तेजी से बढ़ती जा रही है। कुछ जीव तो इसे खाने के साथ निगल जाते हैं, जिससे उनकी जान जा रही, तो कुछ इससे निकलने वाले रसायनों से परेशान हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक हर्मिट केकड़े प्लास्टिक की वजह से बहुत ज्यादा यौन उत्तेजित हो जा रहे हैं। इसको लेकर पर्याप्त सबूत भी शोधकर्ताओं के पास मौजूद हैं।

40 केकड़ों की जांच

40 केकड़ों की जांच

रिसर्च के दौरान इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ हल (University of Hull) के वैज्ञानिकों की टीम ने यॉर्कशायर तट के पानी में पाए जाने वाले 40 केकड़ों की जांच की। जिसमें पता चला कि प्लास्टिक की वजह से केकड़े सेक्स के लिए उत्साहित हो रहे हैं। पीएचडी कर रहे पाउला शिरमाकर के मुताबिक प्लास्टिक में ओलेमाइड समेत कई रसायन निकलते हैं। जब केकड़ा ओलेमाइड के संपर्क में आता है, तो उसकी श्वसन दर बढ़ जाती है। इसके बाद यौन उत्तेजना में भी बढ़ोतरी हो रही।

हार्मोन्स में परिवर्तन

हार्मोन्स में परिवर्तन

शिरमाकर ने बताया कि ओलेमाइड में आर्थ्रोपोड्स द्वारा एक रसायन निकलता है, जो ओलिक एसिड की तरह होता है। आमतौर पर जलीय जीव इसको खाने के साथ निगल जाते हैं। जिस वजह से ये माइक्रोप्लास्टिक के रूप में उनके शरीर के अंदर पहुंच जाता है। इसी की वजह के केकड़े के हार्मोन्स में परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जोकि एक चिंता का विषय है।

पहले आई थी ये चिंताजनक रिपोर्ट

पहले आई थी ये चिंताजनक रिपोर्ट

इससे पहले यूनाइटेड नेशंस ने विश्व के मौसम और वातावरण को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें साफ कहा गया है कि इंसानों ने अंधाधुंध विकास करते हुए अपने सिर पर विनाश के बादल को बुला लिया है। विश्व के हर हिस्से पर ग्लोबल वॉर्मिंग का प्रभाव पड़ेगा। इसके चलते 2040 तक वैश्विक तापमान में 1.25 डिग्री सेल्सियस का इजाफा होगा, जो इस धरती की स्थिति को बिगाड़ने के लिए काफी है।

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