नासा को ब्लैक होल के पास नजर आए 'भूतिया छल्ले', खीचीं गई अद्भुत घटना की तस्वीर

नई दिल्ली, 13 अगस्त: अंतरिक्ष अपने आप में हजारों रहस्यों को समेटे हुए है। अब जैसे-जैसे इंसान तकनीकी रूप से तरक्की कर रहे, वैसे-वैसे उसके रहस्यों से पर्दा उठता जा रहा है। हाल ही में नासा ने एक ब्लैक होल के पास रहस्यमयी छल्ले को कैप्चर किया, जो पृथ्वी से 7800 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। ये स्टारगेट की तरह दिख रहा, जिसे भूतिया छल्ले (Ghostly Rings) कहा जा रहा है।

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    ऑब्जर्वेटरी से ली तस्वीर

    ऑब्जर्वेटरी से ली तस्वीर

    नासा के मुताबिक ब्लैक होल और उससे संबंधित तारा प्रणाली को वी404 सिग्नी (V404 Cygni) के नाम से जाना जाता है। हाल ही में चंद्रा एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी और नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी ने इसकी तस्वीर खींची है। ब्लैक होल सिस्टम तारे से दूर मैटेरियल खींच रहा, जिसमें सूर्य का लगभग आधा द्रव्यमान होता है। ऐसी घटनाएं आमतौर पर एक्स-रे में दिखाई देती हैं।

    पता चल रहा ब्लैक होल का व्यवहार

    पता चल रहा ब्लैक होल का व्यवहार

    चंद्रा एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी के शोधकर्ताओं के मुताबिक ये रिंग खगोलविदों को न केवल ब्लैक होल के व्यवहार के बारे में बताते हैं, बल्कि वी404 सिग्नी और पृथ्वी के बीच संबंध के बारे में भी जानकारी देते हैं। उदाहरण के तौर पर एक्स-रे में रिंगों का व्यास बीच में आने वाले धूल के बादलों से दूरियों को प्रकट करता है, जिससे प्रकाश रिसता है। अगर बादल पृथ्वी के करीब है, तो रिंग बड़ा प्रतीत होता है।

    कॉस्मिक डस्ट का इस्तेमाल

    कॉस्मिक डस्ट का इस्तेमाल

    खगोलविदों के मुताबिक कैन्यन की दीवार से उछलती हुई ध्वनि तरंगों के बजाय, V404 Cygni के चारों ओर प्रकाश गूंज तब उत्पन्न हुई, जब ब्लैक होल सिस्टम से एक्स-रे का एक विस्फोट वी404 सिग्नी और पृथ्वी के बीच धूल के बादलों से उछला। ये कॉस्मिक डस्ट घरेलू धूल की तरह नहीं है, बल्कि धुएं की तरह है। जिसमें छोटे कण होते हैं। ये रिंग ब्लैक होल को समझने में वैज्ञानिकों के लिए काफी मददगार साबित होगा।

    पहले आई थी ये रिपोर्ट

    पहले आई थी ये रिपोर्ट

    हाल ही में खगोलविदों ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें बताया गया कि हमारी आकाशगंगा में एक तारकीय विस्फोट हुआ। इससे जुड़े कुछ सबूत भी मिले हैं। इस पर विस्तार से अध्ययन करने से ब्रह्मांड के 13 अरब साल पहले के रहस्य सुलझ सकते हैं। अध्ययन के मुताबिक तारा "SMSS J200322.54-114203.3" हमारे सूर्य से 7500 प्रकाश वर्ष दूर मिल्की वे (आकाशगंगा) में ही स्थित है। माना जा रहा है कि उसमें एक तारकीय विस्फोट हुआ था, जो सुपरनोवा से भी ज्यादा शक्तिशाली है। इसे 'हाइपरनोवा' के नाम से जाना जाता है।

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