Breathing Plants: सच में पौधे लेते हैं सांस, यकीन नहीं होता तो देखिए ये Video
इंसानों की तरह पौधों को भी हवा की आवश्यता होती है। ये बात अलग है वो ऑसीजन नहीं कॉर्बन डाई ऑक्साइड लेते हैं।

Breathing Plants Fotage: प्रकृति में कई ऐसी अनोखी चीजे हैं, जिनसे विज्ञान के प्रयोगों और सिद्धांतों को समझने में आसानी होती है। इसके साथ ही ये अपनी खास आकार और प्रकार के लिए भी जाने जाते हैं। एक ऐसे पौधे की वीडियो इंटरनेट पर लोगों को आकर्षित कर रही है। जिसमें पौधे को सांस लेते हुए देखा जा सकता है।
रीयल टाइम में 'सांस' लेता ट्री
वीडियो में दिख रही तस्वीर पर एक बार किसी के लिए भी यकीन करना मुश्किल हो सकता है। इससे जुड़ी एक रिसर्च जर्नल पीयर-रिव्यूड जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुई है। लेकिन वास्तविकता तब सामने आई जब वीडियो पौधों रीयल टाइम में 'सांस' लेते देखा गया।
साइंटिस्ट्स ने खींची तस्वीरें
EarthSky टीम के अनुसार वीडियो में पौधे की क्लोज-अप क्लिप को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन डिएगो में साइंटिस्ट्स ने अपने एक शोध प्रोजेक्ट के दौरान कैप्चर किया है। शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि कैसे पौधे अपने छिद्रों का उपयोग करके कैसे सांस लेते हैं। जो कि लगभग सभी वनस्पतियों में होता है। दरअसल पौधे हवा के साथ कार्बन डाइऑक्साइड और पानी अवशोषित करते हैं।
NSF कर रहा रिसर्च
साइंटिस्ट्स की जो टीम ये रिसर्च कर रही वो शोध नेशनल साइस फाउंडेशन (NSF) द्वारा कराया जा रहा है। EarthSky के अनुसार वैज्ञानिकों ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण सफलता है। जिसका आने वाली सदी में वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर प्रभाव पड़ेगा। शोध प्रमुख साइंटिस्ट जूलियन श्रोएडर ने कहा, "शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि भविष्य में पौधों के जल उपयोग दक्षता और कार्बन सेवन की इंजीनियरिंग पर कार्य किया जा सकेगा।" उन्होंने आगे कहा कि वायुमंडल में बढ़ रही कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को भी नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
शोध के लिए पेटेंट का आवेदन
शोधकर्ताओं ने अपनी बायो साइंस रिसर्च (Bio Science reasearch) को लेकर एक पेटेंट भी दायर किया है। वे अपनी शोध निष्कर्षों को फसलों और किसानों के लिए प्रयोग करने वाले हैं। रिसर्च से जुड़े एक बायोकेमिस्ट ने कहा कि नए प्रयोग की तैयारियों और कृषि के लिए प्रयोग की दिशा में कार्ययोजना बनाने पर विचार किया जा रहा है।
नई रिसर्च से लाभ
साइंटिस्ट्स ने दावा किया है कि उनकी रिसर्च कृषि के क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगी। विशेष रूप से गेहूं, चावल और मकई जैसी फसलें, एक नया संतुलन नहीं बना सकते हैं, तो वे सूखने का जोखिम उठाते हैं। खोज से शोधकर्ताओं को उन संकेतों को संपादित करने में मदद मिलेगी जिससे पौधों के बंद रंध्र खोले जा सकेंगे। इससे पौधों को कार्बन डाइऑक्साइड लेने और पानी खोने के बीच सही संतुलन बन सकता है।












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