क्या है भानगढ़ किले का रहस्य? क्या सच में एक राजकुमारी के हुस्न ने बना दिया इसे 'भूतहा किला'?
अलवर, 23 नवंबर। राजस्थान अपने शौर्य की कहानियों के लिए विश्नप्रसिद्ध है। यहां की शान-शौकत, संस्कृति और पहनावा हमेशा से ही लोगों को आकर्षित करता है। राजस्थान जितना अपनी रेत और भोजन के लिए जाना जाता है, उतना ही वो अपने खूबसूरत किलों के लिए भी मशहूर है। यहां के हर किले की कुछ कहानियां हैं, लेकिन यहां एक ऐसा किला है, जहां शाम को जाना मना है, ऐसा माना जाता है कि शाम होते ही इस किले में आत्माएं भटकने लगती हैं और फिर जो भी यहां पहुंचता है उसका लौटकर वापस आना मुश्किल होता है, जी हां, आपने सही समझा हम बात कर रहे हैं 'भानगढ़ किले' की जिसे कि लोग 'भूतहा किला' भी कहते हैं।

क्या है भानगढ़ किले का रहस्य?
हालांकि इस किले में सच में भूत है या नहीं इसकी अधिकारिक पुष्टि आज तक नहीं हुई है लेकिन स्थानीय लोगों की बातें सुनने और उनके भय को देखते हुए यहां पर सूर्यास्त के बाद जाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। मालूम हो कि भानगढ़ का किला राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान के पास है, देखने में बेहद ही सुंदर इस किले को साल 1583 में आमेर के राजा भगवंत दास ने बनवाया था।

बहुत सुंदर थी राजकुमारी रत्नावती
इसके भूतिया होने के पीछे तो वैसे बहुत सारी कहानियां है लेकिन एक कहानी सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और वो है राजकुमारी रत्नावती की, जो बहुत ज्यादा सुंदर थीं। वो भानगढ़ की राजकुमारी थीं और उनकी सुंदरता के चर्चे दूर-दूर तक होते थे। उनसे विवाह करने के लिए कई राजा-महाराजा आतुर थे। उनके स्वयंवर की तैयारी ही चल रही थी कि इसी बीच एक तांत्रिक सिंधिया की बुरी नजर रत्नावती पर पड़ गई। वो उन्हें पाने के लिए पागल हो गया और उसने सोचा कि वो अपने तंत्र-मंत्र से राजकुमारी को अपने वश में कर लेगा।

तांत्रिक ने किया काला जादू
और यही सोचकर उसने राजकुमारी का पीछा करना शुरू कर दिया और एक दिन उसे अपना काला जादू करने का मौका मिल गया। दरअसल रत्नावती एक दिन अपने सखियों और दासी के साथ बाजार में अपने लिए इत्र खरीदने गई थीं। तांत्रिक भी उनके पीछे-पीछे इत्र की दुकान पर पहुंच गया, उसने मौका देखकर इत्र की शीशी पर काला जादू कर दिया और वहीं दुकान के पास वाली पहाड़ी में छिप गया।
रत्नावती काफी होशियार थीं
लेकिन रत्नावती काफी होशियार थीं, उन्होंने जैसे ही इत्र की शीशी उठाई उन्हें एहसास हो गया कि कुछ गड़बड़ है और शायद इस पर काला जादू किया गया है और इसलिए ही उन्होंने उस शीशी को पहाड़ी की तरफ फेंक दिया, उसी पहाड़ी पर तांत्रिक था, शीशी सीधे जाकर उसके सिर में लगी और वो गंभीर रूप से घायल हो गया।

तांत्रिक ने दिया राजकुमारी को श्राप
सिंधिया की हालत बिगड़ गई लेकिन उसने मरते-मरते राजकुमारी को नाश होने का श्राप दे दिया और कहा कि उसे कभी भी मुक्ति नहीं मिलेगी और इसके कुछ दिनों बाद ही भानगढ़ पर दुश्मनों ने हमला किया जिसमें किले में मौजूद सभी लोग मारे गए, जिसमें राजकुमारी रत्नावती भी शामिल थीं।
औरतों की चीखने और रोने की आवाज आती है
अब ये कहानी कितनी सच है, ये कह पाना मुश्किल है लेकिन स्थानीय लोग अक्सर कहते हैं कि किले के पास से औरतों की चीखने और रोने की आवाज सुनाई देती है।कुछ लोग ये भी बोलते हैं कि शाम के वक्त किले के पास जाने पर ऐसा महसूस होता है जैसे कि कोई उनका पीछा कर रहा है, तो वहीं कुछ लोगों ने महल के अंदर कुछ परछाइयों के भी दिखने की बात कही है। इसी वजह से भानगढ़ किले में शाम को जाने में मनाही है।












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