इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर मिले 'एलियंस वैक्टीरिया', इस वजह से पृथ्वी पर उसे लाना चाहते हैं वैज्ञानिक
नई दिल्ली, 17 फरवरी: एलियंस को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं। इसकी खोज के लिए कई देशों ने चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति आदि पर अपने सैटेलाइट्स भेजे हैं, लेकिन अभी कोई खास सबूत हाथ नहीं लगा। अब दावा किया जा रहा है कि इंसानों ने एलियंस की खोज में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है, जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से जुड़ी है। (पहली तस्वीर छोड़ बाकि तस्वीरें सांकेतिक)

नए बैक्टीरिया मिले
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक ISS पर एलियंस पाए गए हैं, क्योंकि वहां पर वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया के तीन नए अनुवांशिक रूपों (वेरिएंट) की खोज की है जो दिन में 250 मील की ऊंचाई पर 15 बार पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। ये सूक्ष्मजीव एक विशेष संयंत्र विकास कक्ष सहित अलग-अलग स्थानों पर पाए गए। इसी जगह पर शोधकर्ता शून्य गुरुत्वाकर्षण में फसलों की खेती करने का प्रयास कर रहे हैं।

मंगल पर करेंगे मदद
साइंस जर्नल फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित नासा के एक अध्ययन के अनुसार, मिथाइलोबैक्टीरियासी के तीन स्ट्रेन पाए गए हैं। ये रॉड के आकार के हैं और चलने में सक्षम हैं। वैज्ञानिकों का लगता है कि ये बैक्टीरिया मंगल पर आबादी बसाने की दिशा में उनकी मदद कर सकते हैं।

पृथ्वी पर लाने का प्लान
खोज इस वजह से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैज्ञानिकों की टीम अब अंतरिक्ष में सूक्ष्म जीवों को इकट्ठा कर उन्हें पृथ्वी पर ला सकती है। इसका मकसद उनका ज्यादा विश्लेषण करना है। वहीं अंतरिक्ष में जिस लैब में फसलों को उगाया जा रहा है, उसको पांच अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियां मिलकर चलाती हैं।

साबित होंगे गेम चेंजर
नासा के वैज्ञानिक डॉ. नितिन कुमार सिंह और डॉ. कस्तूरी वेंकटेश्वरन ने कहा कि नए पाए गए स्ट्रेन अंतरिक्ष फसलों के भविष्य के लिए गेम-चेंजर हो सकते हैं। उनका मानना है कि नए जीवाणुओं को खोजना जरूरी है, क्योंकि ये दुर्लभ संसाधनों के साथ पौधौं की वृद्धि में मदद करते हैं।

बैक्टीरिया को क्यों कह रहे एलियंस?
दरअसल पृथ्वी के बाहर जो भी जीवन होता है, उसे हम आमभाषा में एलियंस कहकर ही बुलाते हैं। एलियंस का मतलब होता है कि दूसरे ग्रह का प्राणी, जानवर आदि। ये जो बैक्टीरिया मिले हैं, उन्हें भी इसी वजह से एलियंस कहा जा रहा है।












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