काली ताकतों से बचने के लिए 16 लाख गंगा में बहा दिए
लखनऊ। भले ही भारत आज विश्व की सबसे उभरती हुई ताकतों में एक हो, भले ही भारत विकास की नयी बुलंदियों को छूने की ओर बढ़ रहा हो लेकिन आज भी देश का एक बड़ा तबका अंधविश्वास के चक्करों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। उत्तर प्रदेश के संभल जिला में एख व्यक्ति ने ढोंगी साधुओं के चक्कर में आकर 16 लाख रुपए गंगा में बहा दिए।

बहजोई के गांव बिसारु में रहने वाले जितेंद्र सिंह एक ऐसी जालसाजी का शिकार हुए जिसने उनसे उनकी जमीन, जायदाद सबकुछ छीन लिया। दरअसल जितेंद्र के घर में एक माह पू्र्व एक युवक आया और उसकी पत्नी को चंद्रवती से कहा कि तुम्हारे घर की जमीन में अकूत संपत्ति गड़ी है जिसने तुम्हारे ससुर की जान ले ली और अब तुम्हारे पति की जान लेगा। जबतक इस माया को खुद से दूर नहीं करती परिवार दूर होता रहेगा।
इसके बाद चंद्रवती ने अपने पति से इस बारे में बताया जिसके कुछ ही दिनों बाद उस युवक ने फोन करके चंद्रवती और उसके पति को राजघाट के गंगा तट पर हवन-पूजा के लिए बुलाया। जहां पहले से ही मौजूद ढोंगी साधू ने हवन के बाद दोनों को घर वापस भेज दिया। लेकिन इस बार बिना किसी रुपए की बात किये लौट जाने पर दोनों दंपत्तियों का साधू पर विश्वास बढ़ गया।
कुछ ही दिनों बाद साधू ने युवक से गंगा में रुपए प्रवाहित करने के लिए बुलाया जिससे की उसके घर में छिपी माया से उसे मुक्ति मिल सके। जिसके बाद युवक अपनी जमीन बेचकर रुपए लेकर गंगा किनारे पहुंच गया। जहां पर साधू ने उससे रुपयों को पॉलीथीन में बांधकर प्रवाहित करने को कहा। साधू ने युवक को भरोसा दिलाया कि जब हवन की प्रक्रिया पूरी हो जायेगी तो उसे उसका रुपया शुद्ध रूप में मिल जायेंगे।
जितेंद्र ने अपनी नौ बीघा जमीन को चार बार में बेचा और सोलह लाख रुपए साधू के कहने पर एक-एक करके गंगा में बहा दिए। यहीं नही साधू ने जितेंद्र को अलग-अलग जगह पर रूपयों को बहाने को कहा। पहले राजघाट के गंगा तट फिर गजरौला के गढ़-मुक्तेश्वर की गंगा, फिर हरिद्वार और आखिर में मुरादाबाद की रामगंगा में रुपए प्रवाहित कराये। साधू ने जितेंद्र को 31 अक्टूबर को बरेली में मिलने की बात कही थी। लेकिन जब साधू लौटकर नहीं आया तो जितेंद्र ने अपने आप को ढगा महसूस किया और पुलिस को इस मामले की जानकारी दी।












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