भारत की 20 गंदी बातें जो हैं कमाई का जरिया

[बविता झा/अजय मोहन] बच्‍चा जब कान में तीली डाल ता है, तो मां बोलती है, 'गंदी बात', कोई हष्‍टपुष्‍ट व्‍यक्ति भीख मांगे तो गंदी बात, लॉटरी का टिकट खरीद ले तो गंदी बात और अगर कोई लड़की मजबूरन जिस्‍मफरोशी के धंधे में पड़ जाये तो भी 'गंदी बात'। लेकिन यही गंदी बात अगर किसी के लिये दो जून की रोटी का सहारा हो, तब आप क्‍या कहेंगे?

आज ग्लोबल इकोनॉमी में जहां दुनिया के अधिकतर ट्रेड को कानूनी तरीके से करने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे बिजनेस भी है जो गैरकानूनी हैं। या फिर यूं कहिये कि वो काम करना गलत है, लेकिन फिर भी वो काम फलफूल रहा है और लाखों लोग उन्‍हीं के बल पर पेट पाल रहे हैं। ना तो इनपर कोई कानून रोक लगा पा रही है ना दी पुलिस प्रशासन।

भारत में इस तरह के गैरकानूनी धंधे कम समय में तेजी से पैसा कमाने का जरिया बनता जा रहा है। कानून की नजर से बचते-बचाते कुछ लोग इस तरह के बिजनेस को तेजी से फैला रहे है। इस गैरकानूनी धंधों में ना तो उन्हें सरकार को टैक्स देने की जरुरत होती है और ना ही किसी सरकारी कार्रवाई से निपटने का झंझट। बस सोचा और शुरु कर दिया बिजनेस। हलांकि खास बात ये भी है कि इन गैरकानूनी धंधों में यहां लागत कम होती है तो मुनाफा करोड़ों में। आइए तस्वीरों के साथ देखते हैं भारत में धड़ल्ले से चलने वाले वो कौन से 20 बिजनेस हैं जो बिना किसी रोक-टोक के चल रहे है।

जिस्मफरोशी का धंधा

जिस्मफरोशी का धंधा

वेश्यावृत्ति का धंधा भारत में तेज रफ्तार से बड़ता जा रहा है। सालों से सेक्स का ये गोरखधंधा हमारे समाज में फल-फूल रही है। करोड़ों की कमाई के इस बिजनेस में हजारों लड़कियां और दलाल शामिल है।

नकली और पायरेटेड सीडी

नकली और पायरेटेड सीडी

ग्लोबल रेवेन्यू 2012- करीब 250000 करोड़ रुपए। नकली सामग्री और पायरेटेड सामान का कारोबार बेहद बढ़ चुका है। ज्यादातर बड़ें ब्रांड के डुप्लिकेट और नकली मॉडल बाजार में आसानी से मिल जाते हैं जो कि काफी सस्ते भी होते हैं।

भिखारियों की रोज की कमाई 100 रु.

भिखारियों की रोज की कमाई 100 रु.

सड़कों पर रोज सुबह निकलते ही आपको भीख मांगते लोग आसानी से मिल जाएंगे। भगवान के नाम का सहारा लेकर बच्चे-बूढ़े, विकलंगा, महिलाएं आपसे मदद मांगते है। आपकी दया पर उनका जीवन चलता है। करोड़ों की कमाई का जरिया बना धंधा धीरे-धीरे अपराध का रुप लेता जा रहा है।

देशी शराब का धंधा

देशी शराब का धंधा

भारत में शराब की ब्रिकी और निर्माण के लिए लाइसेंस लेने का कानून है। जिसे सरकार से लाइसेंस देती है वो ही शराब बेच और बना सकता है, लेकिन भारत में अवैध रुप से देशी शराब बनाने और बेचने का धंधा चल रहा है। त्यौहारों के मौके पर ये धंधा तेजी से बढ़ने लगता है। कई बार ये अवैध शराब लोगों की मौत का कारण बन जाता है। जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत की खबरें मीडिया में आती रहती है।

नन्हें हाथों से कमाई

नन्हें हाथों से कमाई

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार दुनिया भर में 21 करोड़ से अधिक बच्चों से मजदूरी करवाई जाती है। भारत में सबसे ज्यादा होता है बाल श्रम। छोटे-छोटे बच्चों से दुकानों, फैक्टियों, घरों में काम करवाया जाता है। इस कारोबार के फलने-फूलने की वजह सस्ता मजदूरी है। बच्चे कम कीमत पर ही काम करने को तैयार हो जाते है।

कान की सफाई से कमाई

कान की सफाई से कमाई

भारत विविधताओं का देश है। यहां लोगों के कमाई का जरिया भी अलग-अलग है। इन्हीं में से एक धंधा है कान की सफाई। सड़कों पर किसी अजीब से औजार से ये लोग आपको दूसरों के कान की सफाई करते दिख जाएंगे। कान की सफाई का ये धंधा बरसों से चलता आ रहा है।

सड़क पर डेंटिस्ट

सड़क पर डेंटिस्ट

दंतों में तकलीफ पर हम सबसे पहले अपने डेंटिस्ट के पास भागते है, लेकिन अब भी कुछ लोग ऐसे है जो सड़कों पर आपको दूसरे के दांतों की समस्याओं को ठीक करते दिखा जाएंगे। रोड के किनारे बैठकर ये लोग दूसरों के दांतों को पने तरीके से ठीक कर अपना भरण-पोषण करते है।

मिलावट की महामारी

मिलावट की महामारी

सबसे बड़ा उदाहरण दूध है। देश का शायद ही कोई दूध वाला होगा, जिसने दूध में पानी नहीं मिलाया हो। इसके अलावा खाद्य पदार्थों में जिस प्रकार मिलावट हो रही है, वह भी सोचने का विषय है। आम, सेब और खरबूजा, तरबूज, ककड़ी आदि फलों में विष के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। केला ऐसे केमिकल्स छिड़कर पकाया जाता है, जो स्वास्थ्य केलिए हानिकारक है। अनाज यूरिया की अधिक मात्रा के कारण विषैला हो रहा है।

डुप्लीकेट का बाजार

डुप्लीकेट का बाजार

भारत में ज्यादातर लोग मध्यम वर्गीय परिवार के है। जिनकी कमाई सामान्य है। ऐसे में वो ब्रांडेड कपड़ों और सामानों को खरीदने में अक्षम है। उनकी इसी अक्षमता के कारण भारत में डूप्लीकेट सामान का बाजार चांदी कर रहा है। असली-नकली में फर्क करना मुश्किल है। ऐसे में डूप्लीकेट मार्केट का बाजार भारत में तेजी से फल-फूल रहा है।

गुर्दे की खरीद-फरोख्त

गुर्दे की खरीद-फरोख्त

गुर्दा या शरीर के किसी भी अंग की खरीद और बिक्री भारत में गैरकानूनी है। बावजूद इसके सभी जानते हैं कि ये देश के हर हिस्से में काफी तेजी से फैल रहा है। लोग पैसों की लालच में गैरकानूनी ढंग से अंगों का व्यापार करते है।

बोतल में पेट्रोल

बोतल में पेट्रोल

कानून के अनुसार बोतल में पेट्रोल खरीदना या बेचना कानूनन अपराध है, लेकिन देश का कोई भी पेट्रोल पम्‍प ऐसा नहीं है, जो बोतल में पेट्रोल देने से इंकार करता हो। तस्‍वीर में आप देख सकते हैं, कैसे दूध के केन में पेट्रोल दिया जा रहा है।

कन्या भ्रूण हत्या

कन्या भ्रूण हत्या

भारत में सबसे ज्यादा आपराधिक मामलों में से एक कन्या भ्रूण हत्या है। खास बात की इस तरह के अधिकांश मामले पुलिस तक पहुंचते ही नहीं है। डॉक्टरी पेशे के नियमों के खिलाफ जाकर कुछ चिकित्सक इस गैरकानूनी काम को अंजाम देते है।

ट्रेन की छतों पर बैठना

ट्रेन की छतों पर बैठना

कानूननी रूप से ट्रेन की छत पर बैठकर यात्रा करना कानूनन जुर्म है, लेकिन फिर भी लोग चढ़ते हैं और पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती है। यहां पर कमाई होती है, रेलवे की, क्‍योंकि ये लोग टिकट तो लेते हैं, पर सीट नहीं मिलती।

किराए के कोख का गलत इस्तेमाल

किराए के कोख का गलत इस्तेमाल

भारत में किराए के कोख यानी कि सेरोगेसी के लिए अब तक कोई कानून नहीं है। नियमों और कानून के अभाव में तेजी से पैसा कमाने के लिए लोग धड़ल्ले से इस कारोबार में धकेले जा रहे है। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इ लाकों की महिलाएं इस गोरखधंधे में लिप्त है। दूसरे के बच्चे को अपने कोख में पालने के एवज में ये दंपत्तियों से मोटी रकम देती है।

कॉपी कंटेंट

कॉपी कंटेंट

देश भर में तमाम वेबसाइटें चल रही हैं, जो हर रोज अन्‍य वेबसाइटों से कंटेंट को कॉपी करती हैं, लेकिन उन पर कोई रोकटोक नहीं है। न ही अभी तक किसी भी राज्‍य की साइबर क्राइम सेल ने ऐेसी साइटों के खिलाफ प्रतिबंध की बात की है।

ट्रेन में सिगरेट

ट्रेन में सिगरेट

ट्रेन में सिगरेट पीने वालों की तो छोड़ दीजिये, बेचने वालों की भी कमी नहीं है। जबकि ट्रेन में सिगरेट पीना यानी धूम्रपान करना कानूनन अपराध है, लेकिन देश की बड़ी ट्रेनों को छोड़ कर कोई ऐसी ट्रेन नहीं है, जिसमें लोग धूम्रपान नहीं करते हैं। पकड़े भी जाते हैं, तो महज 100-200 रुपए लेकर छोड़ दिये जाते हैं।

छोटे सिलेंडर रीफिलिंग गैस

छोटे सिलेंडर रीफिलिंग गैस

देश का कोई ऐसा शहर नहीं है, जहां एलपीजी के छोटे सिलेंडर नहीं मिलते हों। शायद आपको नहीं मालूम होगा कि कोई भी गैस कंपनी अधिकारिक रूप से छोटे सिलेंडरों की री-फिलिंग फिलहाल नहीं करती है। देश के तमाम घनी आबादी वाले इलाकों के बीच में स्थित घरों के अंदर सिलेंडरों की री-फिलिंग होती है। हालांकि सरकार इस संबंध में नये नियम लाने वाली है, जिसके तहत अधिकारिक रूप से छोटे सिलेंडर पेट्रोल पम्‍पों पर मिलेंगे।

ठेले पर आयुवेर्दिक दवाएं

ठेले पर आयुवेर्दिक दवाएं

कई प्रकार के लोशन व मल्‍हम, पेट दर्द का चूरन, आदि समेत ठेले पर आयुर्वेदिक दवाएं बेचने वाले वैध सही मायने में अवैध हैं। इनके पास दवाएं बेचने का कोई रजिस्‍ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं होता है। अक्‍सर आपको सड़क किनारे तम्‍बू गाड़े हुए लोग आयुर्वेदिक दवाएं बेचते दिख जाते होंगे। है तो वो गलत काम, लेकिन पेट के लिये लोग उसे छोड़ नहीं सकते।

तंत्र मंत्र, टोना टोटका

तंत्र मंत्र, टोना टोटका

तंत्र-मंत्र का जाल बिछाकर लोगों को बेवकूफ बनाना कानूनन जुर्म है। लेकिन धर्म की आढ़ में किये जाने वाले इस धंधे पर कोई लगाम नहीं है।

संडास

संडास

मानवाधिकार आयोग की पहले के बाद बने कानून के अनुसार मैला ढोने की प्रथा को पूरे देश में समाप्‍त कर दिया गया है। लेकिन सिर्फ कागजों पर। आज भी तमाम छोटे कस्‍बों में संडास की लैटरीन होती है, जिसमें रोज सुबह सफाई कर्मी लैटरीन उठाने आते हैं। मैला ढोने वालों की सिर्फ मजबूरी है, जो वो ये काम करते हैं।

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