NIA को लगा बिलासपुर हाईकोर्ट से झटका, झीरमघाटी कांड की जांच कराने छत्तीसगढ़ सरकार हुई स्वतंत्र

NIA को लगा बिलासपुर हाईकोर्ट से झटका, झीरमघाटी कांड की जांच कराने छत्तीसगढ़ सरकार हुई स्वतंत्र

बिलासपुर,02 मार्च। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार अब 25 मई 2013 को हुए झीरमघाटी नक्सल हमले की जांच करवाने के लिए स्वतंत्र हो चुकी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांच के संबंध में एनआईए की तरफ से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने झीरम हमले में जान गंवाने वाले कांग्रेस नेता उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार की याचिका को स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ सरकार अब अपनी एजेंसी से घटना की जांच कराने के लिए स्वतंत्र है।

जितेंद्र मुदलियार को मिली राहत ,NIA को लगा झटका

गौरतलब है कि झीरम नक्सल हमले में शहीद हुए कांग्रेस नेता उदय मुुदलियार के पुत्र जितेंद्र मुदलियार ने दरभा थाने में FIR दर्ज कराकर मांग की थी कि झीरम घाटी हत्याकांड में राजनीतिक साजिश किये जाने की आशंका पर भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने NIA की जाँच से इतर छत्तीसगढ़ सरकार की स्वतंत्र जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच की वकालत की थी। इस एफआईआर को NIA ने जगदलपुर के स्पेशल कोर्ट में चुनौती दी थी,जहां से राहत ना मिल पाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था।

भूपेश बघेल सरकार को बड़ी राहत, छत्तीसगढ़ सरकार झीरमघाटी हत्याकांड की जांच करवाने के लिए स्वतंत्र

बुधवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में अपना फैसला सुनते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानि NIA की याचिका को खारिज कर दिया ,अदालत के इस फैसले से भूपेश बघेल सरकार को बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ सरकारअब झीरम घाटी हत्याकांड मामले में राज्य की एजेंसी के जरिये जांच करवाने के लिए स्वतंत्र हो गई है। यह भी जानना जरुरी है कि NIA ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके कहा था कि वह झीरमघाटी हत्याकांड की जांच करने के लिए सक्षम है, तो राज्य सरकार की एजेंसी इसकी जाँच क्यों कर रही है। इसपर रोक लगनी चाहिए,क्योंकि दिशा भटकने से जांच प्रभावित होगी।

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झीरमघाटी हमले की सही जांच होगी,दोषी जायेंगे सलाखों के पीछे:कांग्रेस

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज सुशील आनंद शुक्ला ने कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार झीरमकांड के पीछे के छिपे राजनीतिक षड्यंत्र को सामने लाना चाहती है,इसलिए आईआईटी का गठन करके जांच करवाने का फैसला लिया गया था। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार एनआईए के ज़रिये जांच में अड़ंगा लगा रही थी। शुक्ला ने उम्मीद जताई कि अब झीरमघाटी हमले की सही जांच होगी और दोषी सलाखों के पीछे जायेंगे।

25 मई 2013 को हुआ था झीरमघाटी नक्सल हमला

गौरतलब है कि 25 मई 2013 को कांग्रेस नेताओं का काफिला अपने चुनावी अभियान परिवर्तन यात्रा पर निकला हुआ था। इसी दौरान सुकमा के झीरम घाटी क्षेत्र से करीब 25 गाड़ियों में निकल रहे ,200 कांग्रेस नेताओं के पर नक्सलियों ने हमला कर दिया था। इस घटना में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा ,विद्याचरण शुक्ल समेत कई नेताओं की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। कांग्रेस इसे राजनीतिक षड्यंत्र मानती है। इसी वजह से राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की जांच बंद होने के बाद ,सत्ता पर काबिज होते ही बघेल सरकार ने SIT गठित करके झीरम कांड की जांच कराने का फैसला लिया था।

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