40 हज़ार किलो देशी घी से रखी गई थी राजस्थान के इस ऐतिहासिक मंदिर की नींव, जानिए मंदिर का इतिहास
बीकानेर। पानी के स्थान पर घी के उपयोग से मंदिर का निर्माण सुनने में अजीब लगता है ना। जैसे कोई हवाई बात कर रहा हो। तो रुकिए हजूर आज हम आपको ऐसे ही मंदिर के बारे में बताते हैं, जिसकी नींव का निर्माण एक या दो किलो नहीं बल्कि चालीस हजार किलोग्राम घी से किया गया है।

हम बात कर रहे बीकानेर विश्व प्रसिद्ध भांडाशाह जैन मंदिर की जिसकी नींव घी से भरी गई। यही नहीं इस मंदिर में मथेरण व उस्ता कला से चित्रकारी भी की गई है। जिसे देखने के लिए रोजना बड़ी संख्या में देशी विदेशी पर्यटक आते हैं और इन तस्वीरों को अपने कमरे में कैद करके ले जाते हैं। बीकानेर के लक्ष्मीनाथ मंदिर के पास स्थित पांच शताब्दी से ज्यादा प्राचीन भांडाशाह जैन मंदिर दुनिया में अपनी अलग ही ख्याति रखता है। इस का निर्माण भांडाशाह नाम के व्यापारी ने 1468 में बनवाना शुरू करवाया और इसे 1541 में उनकी पुत्री ने पूरा कराया था। मंदिर का निर्माण भांडाशाह जैन द्वारा करवाने के कारण इसका नाम भांडाशाह पड़ा गया।
जमीन से करीब 108 फीट ऊंचे इस जैन मंदिर में पांचवें तीर्थकर भगवान सुमतिनाथ जी मूल वेदी पर विराजमान हैं। यह पूरा मंदिर तीन मंजिलों में बंटा है। इस मंदिर को लाल बलुआ पत्थरों और संगमरमर से बनाया गया है। मंदिर के भीतर की सजावट बहुत सुंदर है। इसमें मथेरण व उस्ता कला का शानदार काम किया गया है। इतिहासकार डॉ. शिव कुमार भनोत के अनुसार इस मंदिर के अंदर के भित्ति चित्र और मूर्तियां भी बहुत दिलचस्प हैं। मंदिर के फर्श, छत, खम्बे और दीवारें मूर्तियों और चित्रकारी से सुसज्जित हैं। मंदिर राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक की श्रेणी में है। मंदिर के 500 वर्ष पूर्ण होने पर डाक विभाग द्वारा विशेष आवरण एवं विरुपण जारी किया गया था।
मंदिर को देखने के आने वाले विदेशी पर्यटक सेम कहते हैं कि ये मंदिर अपने आप में अनोखा है। स्थानीय कलाकारों द्वारा की चित्रकारी व स्थापत्य कला की मूर्तिया आकर्षित करती है। इसके निर्माण में 40 हजार किलोग्राम घी का उपयोग करना इसे विशेष बनाता है। ये मेरा सौभाग्य जो इसको देखने आया।












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