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क्या RJD के बाहुबली नेता प्रभुनाथ सिंह को डबल मर्डर में दोषी ठहराया जाना, महागठबंधन के लिए झटका है?

बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से सियासी तौर पर बड़ा झटका लगा है। 1995 में चुनावों के दौरान एक डबल मर्डर के केस में आरजेडी के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता प्रभुनाथ सिंह को सर्वोच्च अदालत ने दोषी करार दिया है।

प्रभुनाथ सिंह बिहार की राजनीति में अपने बाहुबल की वजह से ही जाने जाते हैं। वह महाराजगंज सीट से तीन बार सीएम नीतीश कुमार के जेडीयू (समता पार्टी समेत) और एक बार लालू यादव के राजद से सांसद रह चुके हैं। जाति आधारित राजनीति के लिए चर्चित बिहार में प्रभुनाथ सिंह राजपूत से ताल्लुक रखते हैं।

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राजपूत वोट बैंक पर लगी है महागठबंधन की नजर
बिहार में महागठबंधन के दोनों प्रमुख दलों राजद और जदयू की नजर इस बार राजपूत वोट बैंक को लुभाने पर लगी हुई है। पिछले अप्रैल महीने में ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार एक और बाहुबली राजपूत नेता आनंद मोहन सिंह को जेल मैनुअल में बदलाव करके आजाद कराने के लिए विरोधियों के निशाने पर आ चुकी है।

महागठबंधन के नेता अपराधियों के जरिए कुर्सी हासिल करना चाहते हैं- बीजेपी
सुप्रीम कोर्ट ने प्रभुनाथ सिंह को डबल मर्डर केस में ट्रायल कोर्ट और पटना हाई कोर्ट के फैसले को पलट कर दोषी करार दिया है। इसके बारे में ओआई में हमारे सहयोगी इंज़माम वहीदी ने बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता तारकिशोर प्रसाद से खास बात की है।

उन्होंने कहा, 'प्रभुनाथ डबल मर्डर केस में दोषी करार दिए गए हैं, वहीं प्रदेश में नियम में बदलाव के कारण आनंद मोहन को जेल से बाहर निकाला गया। इन सब मामले में साफ जाहिर है कि प्रदेश सरकार में अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है, अपराध को बढ़ावा दिया जा रहा है। महागठबंधन के नेता अपराधियों के जरिए कुर्सी हासिल करना चाहते हैं।'

बीजेपी झूठ बोलकर भ्रमित कर रही है- आरजेडी
इसके जवाब में आरजेडी नेता मनोहर यादव ने ओआई से कहा है, 'सबसे ज्यादा अपराधी भाजपा के हैं... किसी भी पार्टी के दागी नेता भाजपा में शामिल होते हैं तो वो दूध से धुल जाते हैं, गंगाजल से पवित्र हो जाते हैं। आंकड़े उठा कर देख लीजिए, सबसे ज्यादा भ्रष्टाचारी भाजपा में हैं। जिन प्रदेशो में भाजपा की सरकार है, हरियाणा, मणिपुर में, सभी राज्यों में लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ हो रहा है, वो अपने प्रदेशों और केंद्र से अपराध पर लगाम लगाने में नाकामयाब हैं। दूसरे प्रदेश में जहां उनकी सरकार नहीं है, झूठी बात बोल कर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।'

अभी भी हत्या के मामले में जेल में बंद हैं प्रभुनाथ
राजनीति में प्रभुनाथ सिंह की छवि एक ऐसे बाहुबली की रही है, जो अगर चुनाव हारा तो विरोधियों को बम से उड़ा दिया। वे अभी भी झारखंड के हजारीबाग सेंट्रल जेल में हत्या के ही एक अन्य मामले में बंद हैं। लेकिन, अपने क्षेत्र में ऐसे नेताओं का काफी दबदबा रहा है। उनकी लोकसभा सीट महाराजगंज राजपूतों का गढ़ माना जाता है।

आनंद मोहन को जेल से रिहा करवा चुकी है नीतीश सरकार
जबकि, आनंद मोहन सिंह हाल तक आईएएस अधिकारी और गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की हत्या के आरोप में सजा काट रहे थे। एक दलित अफसर की हत्या के दोषी के रिहाई के लिए नियम बदले जाने को लेकर आरोप लगे थे कि नीतीश सरकार ये सब 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए किया है।

अभी राजपूत वोट बैंक पर दोनों का कैसा है प्रभाव?
लेकिन, सवाल है कि प्रभुनाथ सिंह हों या आनंद मोहन सिंह, क्या इन राजपूत नेताओं का आज भी अपने क्षेत्र में वही पहले वाला जनाधार बचा हुआ है। इसके बारे में ओआई से पटना के एक वरिष्ठ पत्रकार विजय झा ने कहा कि 'यह मूल रूप से अवधारणा की राजनीति है। प्रभुनाथ सिंह पहले लालू यादव के धुर विरोधी थे....फिर उन्हीं के साथ मिलने से इनकी राजनीतिक विश्वसनीयता कम हो गई....अब महाराजगंज में भी इनका खास प्रभाव नहीं बचा है....'

वहीं आनंद मोहन के बारे में भी उन्होंने कहा है कि 'पहले कोसी और तिरहुत के इलाके में इनका एक तबके पर प्रभाव था....खासकर युवाओं पर....लेकिन अब पहले वाली बात नहीं रह गई है। राजनीतिक दल ऐसे चेहरों को सामने रखकर सिर्फ एक धारणा बनाने की कोशिश करते हैं.....'

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