पति को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए पत्नी ने तोड़ी समाज की परंपरा
पत्नी के द्वारा किए गए इस काम की चर्चा पूरे जिले में बड़ी जोर-शोर से हो रही है। लेकिन समाज को एक तरह से आइना भी दिखाया गया है।
पटना। पति की मृत्य के बाद पत्नी उसकी मुक्ति मांग रही थी। लेकिन कोई भी उसके पति की आत्मा को मुक्ति दिलाने के लिए तैयार नहीं था। फिर समाज की परंपरा को तोड़ पत्नी ने अपने पति को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाई। पति का जिंदगी भर साथ निभाने की कसम खाने वाली पत्नी ने सामाजिक कहा-सुनी को दूर करते हुए ऐला कदम उठाया कि लोग देखते रह गए।

मामला बिहार के भोजपुर जिले में देखने को मिला जहां पति की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार के लिए कोई भी मर्द नहीं दिख रहा था। क्योंकि उसके कोई अपनी संतान नहीं थी और आस-पड़ोस के लोगों से काफी दिनों से विवाद भी चल रहा था। वहीं पति की लाश दरवाजे पर पड़ी हुई थी, जिसे मुक्ति दिलाने के लिए समाज की परंपरा को तोड़ते हुए पत्नी ने मुखाग्नि दी और कर्मकांड को निभाते हुए सारी परंपराओं के साथ श्राद्ध किया। पत्नी के द्वारा किए गए इस काम की चर्चा पूरे जिले में बड़ी जोर-शोर से हो रही है।
जानकारी के मुताबिक भोजपुर जिले के बिहियां थाना क्षेत्र के महुआव गांव की रहने वाली सोनामति के पति विश्वंभर मिश्र की मृत्यु समय से पहले हो गई थी। जहां पत्नियां इस गमगीन मौके पर बेसुध हो जाती हैं सोनामति को चिंता थी अपने पति की आत्म शांति की। जब अंतिम संस्कार के लिए कोई भी मर्द आगे नहीं आया तो उसने खुद ही पति को मुखाग्नि देने का फैसला किया और सारी परंपराओं को तोड़ते हुए उसे निभाया।
आपको बता दें कि समाज में इस तरह के काम के लिए बेटे या किसी पुरुष को चुना जाता है पर यहां समाज परंपरा तोड़ पहली बार किसी महिला ने मुखाग्नि दी और श्राद्ध के सारे कर्मकांडों को पूरा किया। वहीं जिसने भी महिला के इस कामों को देखा वो उसकी चर्चा करने लगा। लोगों का कहना था कि निसंतान होने के बाद भी महिला ने अपने पति को मुक्ति दिलाने के लिए श्राद्ध की हर क्रिया को पूरा किया है। जिसकी चर्चा पूरे जिले में बड़े ही जोरों पर है।












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