Lalan Singh ने क्यों दिया इस्तीफा, तेजस्वी से जुड़ी इस चर्चा ने उड़ा दी थी नीतीश की नींद?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दूसरी बार जेडीयू की कमान सीधे अपने हाथों में ले ली है। कई दिनों से मीडिया में जो बातें चल रही थी और जेडीयू उसे ठुकरा रहा था कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की छुट्टी होने वाली है, वह बात शुक्रवार को सही साबित हुई।
ललन सिंह ने दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अध्यक्ष पद छोड़ दिया। यहां ये बताना जरूरी है कि ललन सिंह पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की खबरों का लगातार खंडन कर रहे थे।

दूसरी बार जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नीतीश
इससे पहले नीतीश कुमार 2016 में जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत शरद यादव को हटाकर पार्टी के अध्यक्ष पद पर काबिज हुए थे। ललन सिंह ने अपने इस्तीफे के साथ ही अध्यक्ष पद के लिए नीतीश का नाम आगे बढ़ाया।
ललन सिंह ने इस्तीफे में चुनावी व्यस्तता का दिया हवाला
बाद में जेडीयू नेता और बिहार में मंत्री विजय कुमार चौधरी ने पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन को 2024 के लोकसभा चुनावों से जोड़ने की कोशिश की। उनके मुताबिक ललन सिंह ने नीतीश से कहा कि वह चुनावों में व्यस्त रहेंगे, इसलिए पार्टी की कमान उन्हें सौंपना चाहते हैं।
ललन सिंह अभी बिहार के मुंगेर लोकसभा सीट से सांसद हैं और उनके मुताबिक वह चाहते हैं कि लोकसभा चुनावों के वक्त में मुख्यमंत्री पार्टी का नेतृत्व करें।
जेडीयू के भीतर ललन सिंह की कार्यशैली की हो रही थी आलोचना-रिपोर्ट
लेकिन, न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ललन सिंह की कार्यशैली को लेकर जेडीयू के भीतर उनकी काफी आलोचना चल रही थी और यह बात कुछ नेताओं ने हाल में सीएम को भी बताई थी।
शायद यही वजह है कि गुरुवार को उन्होंने ललन सिंह को अपने साथ दिखाकर उन्होंने पार्टी में एकजुटता की तस्वीर दिखाने की कोशिश की थी।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नीतीश ने यही कहा कि वह निजी तौर पर पार्टी की अध्यक्षता नहीं लेना चाहते, लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के फैसले से बंधे हुए हैं।
तेजस्वी को सीएम बनाने के चक्कर में नपे ललन सिंह- रिपोर्ट
इस बीच मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ललन सिंह के इस्तीफे को लेकर एक बड़ी खबर आई है। न्यूज चैनल आजतक ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ललन सिंह पिछले कुछ दिनों से लालू यादव के बेटे और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने के चक्कर में पड़े हुए थे।
12 विधायकों की गुप्त बैठक पड़ी ललन सिंह पर भारी ?
जानकारी के मुताबिक उन्होंने तेजस्वी को सीएम बनाने का प्रस्ताव सीएम नीतीश के सामने भी रखा था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। इसके बाद ही जेडीयू के 12 विधायकों की गुप्त बैठक की खबर आई थी, जिसकी जानकारी जेडीयू सुप्रीमो तक को नहीं थी। शायद यही वजह है कि आखिरकार ललन सिंह को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ गया।
जेडीयू की बैठक में नीतीश के कार्यों की जमकर हुई तारीफ
वैसे जेडीयी की बैठक में कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिसमें नीतीश कुमार के नेतृत्व की काफी सराहना की गई। खासकर इंडिया ब्लॉक के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना को बढ़ावा देने और बिहार में जाति सर्वे कराने के लिए उनकी तारीफ की गई। बैठक में बिहार में आरक्षण की सीमा 60 फीसदी से बढ़ाकर 75 फीसदी करने के लिए भी उनकी जमकर तारीफ की गई।
गुरुवार तक जेडीयू मीडिया की खिल्ली उड़ाने में लगा था
वैसे जनता दल (यूनाइटेड) में शुक्रवार को जो कुछ हुआ उसकी भनक मीडिया को पहले से लग चुकी थी। लेकिन, गुरुवार तक जेडीयू नेता इन खबरों की खिल्ली उड़ाने में लगे हुए थे। गुरुवार को ही खुद ललन सिंह ने पार्टी में किसी तरह के मतभेद या नेतृत्व परिवर्तन की बातों को नकारने की कोशिश की थी।
ललन सिंह भी उड़ा रहे थे मीडिया का मजाक
उन्होंने कहा था, 'आप लोग नैरेटिव सेट करना चाह रहे हैं.....जेडीयू एक है और एकजुट रहेगा....।' खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी दिल्ली निकलने से पहले पटना में इसी तरह का संकेत दिया था।
ललन सिंह ने तो यहां तक कहा था कि 'अगर मुझे इस्तीफा देना होगा, मैं आप लोगों को बुलाऊंगा और चर्चा करूंगा कि इस्तीफे में क्या लिखना है, ताकि आप बीजेपी ऑफिस जाकर ड्राफ्ट तैयार कर सकें।'












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