56 साल के अमित शाह ने 37 साल के चिराग पासवान को ‘भाई’ क्यों कहा ?

56 साल के अमित शाह ने 37 साल के चिराग पासवान को 'भाई' क्यों कहा? क्या बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा एक बार फिर लोजपा को गठबंधन में शामिल कर लेगी ? भाजपा के शक्तिशाली नेता अमित शाह ने इससे इंकार नहीं किया है। इस सवाल के संबंध में उन्होंने जो कहा है उससे संकेत मिल रहा है कि ऐसा हो सकता है। चिराग पासवान के प्रति प्रकाश जावड़ेकर चाहे जितना आक्रामक हों लेकिन अमित शाह तो बड़े प्यार से पेश आ रहे हैं। अमित शाह को एक सख्त नेता माना जाता है लेकिन उनका चिराग के लिए स्नेह भरा प्रदर्शन हैरान करने वाला है। अमित शाह ने एक इंटरव्यू में चिराग पासवान के लिए 'भाई' शब्द का इस्तेमाल किया है। क्या वे चिराग पासवान को छोटा भाई मानते हैं ? तो फिर बिहार में सुशील मोदी क्यों चिराग के खिलाफ आग उगल रहे हैं ?

चिराग भाई से कई बार बात हुई– अमित शाह

चिराग भाई से कई बार बात हुई– अमित शाह

तीन-चार दिन पहले चिराग पासवान ने कहा था, जब मैंने जदयू से अलग जाने की बात कही तो अमित शाह जी चुप्पी साधे रहे। जब इस संबंध में अमित शाह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, इसके बारे में अखबार में पढ़ा कि मैंने नहीं कहा या उन्होंने नहीं कहा... मेरी चिराग भाई से कई बार बात हुई, इतनी सीटों बनती हैं आपकी, इतनी सीटों पर मान जाइए। अगर कुछ है तो निगोसिएशन के लिए आइए। अमित शाह, चिराग पासवान से उम्र में करीब 19 साल बड़े हैं। यानी दोनों में एक पीढ़ी का अंतर है। फिर भी अमित शाह ने चिराग को भाई क्यों कहा ? बातचीत में यूं ही कह दिया या उनका चिराग के लिए विशेष अनुराग है ? अमित शाह इस पूरे प्रकरण को लेकर बेहद सतर्क हैं। जब उनसे चिराग के मुत्तलिक सवाल किया गया तो उन्होंने बात रामविलास पासवान की श्रद्धांजलि से शुरू की। उन्होंने रामविलास पासवान के लिए जो आदर और सम्मान दिखाया उससे उनकी सोच का अंदाजा लगाया जा सकता है। अमित शाह का चिराग के प्रति यह नजरिया पार्टी के दूसरे नेताओं से बिल्कुल अलग है। अमित शाह ने चिराग के अलग होने के फैसले पर दुख तो जताया लेकिन प्रधानमंत्री के नाम लेने पर कोई टिप्पणी नहीं की। प्रकाश जावड़ेकर लोजपा को वोटकटवा कह रहे हैं तो अमित शाह चिराग को भाई कह रहे हैं। क्या भाजपा इसलिए ऐसा कर रही ताकि चुनाव के बाद संभावनाओं की खिड़की खुली रहे ?

चुनाव के बाद लोजपा फिर आएगी भाजपा के साथ ?

चुनाव के बाद लोजपा फिर आएगी भाजपा के साथ ?

क्या चुनाव के बाद चिराग के वापस आने की संभावना है ? इस सवाल का जवाब भी अमित शाह ने सकारात्मक रूप से दिया। अगर अमित शाह के मन में चिराग या लोजपा के लिए कोई खुन्नस रहती तो वे इससे सीधे इंकार कर देते। लेकिन उन्होंने कहा, इस मामले में चुनाव के बाद देखेंगे। अभी तो आमने सामने लड़ रहे हैं। डट कर लड़ रहे हैं। हमारे कार्यकर्ता, हम, वीआइपी, जदयू और भाजपा के उम्मीदवारों को जिताने के लिए काम कर रहे हैं। सहयोगी दलों के कार्यकर्ता भी भाजपा के उम्मीदवारों को जिताने के लिए काम कर रहे हैं। जैसे बिहार में सुशील मोदी लोजपा को दुश्मन करार दे रहे हैं वैसे अमित शाह ने क्यों नहीं कड़वी बात कही ? क्या पटना और दिल्ली में भाजपा का अलग- अलग खेल चल रहा है ? 2015 में भाजपा ने नीतीश कुमार और लालू यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा था। लेकिन वह हार गयी थी। दो साल बाद ही ऐसी परिस्थियां बनीं कि नीतीश कुमार ने लालू को छोड़ कर भाजपा के साथ सरकार बना ली। राजनीति में असंभव कुछ भी नहीं। क्या 2020 के चुनाव में ऐसा ही कुछ होगा और उसमें लोजपा प्रमुख भागीदार होगी ? ये सारे संभावनाएं तब अस्तित्व में आएंगी जब लोजपा चुनाव में कुछ सम्मानजनक जीत हासिल करे। पिछले दो चुनावों से लोजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। इस बार अकेले चुनाव लड़ने का फैसला बहुत जोखिम वाला है। रामविलास पासवान की मौत से उपजी सहानुभूति पर ही लोजपा का भविष्य टिका है। चिराग वोट को ध्यान में रख कर ही बार-बार नरेन्द्र मोदी का नाम ले रहे हैं।

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    चिराग की चुटकी

    चिराग की चुटकी

    बिहार भाजपा के नेता चिराग से बिल्कुल परहेज कर रहे हैं लेकिन चिराग भाजपा के प्रचारक बन गये हैं। अब उन्होंने अपने समर्थकों से कहा है, भाजपा के पक्ष में वोट कीजिए, चुनाव बाद भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनेगी। भाजपा के नेता चिराग पर लील-पीले हो रहे हैं लेकिन वे न तो नरेन्द्र मोदी का नाम लेना छोड़ रहे हैं और न ही कोई जवाबी वार कर रहे हैं। इससे बिहार भाजपा के नीति निर्धारकों की खीझ बढ़ती जा रही है। उन्हें उम्मीद थी कि एक-दो बार मना करने पर चिराग मोदी के नाम की रट छोड़ देंगे लेकिन यहां तो उल्टा हो गया। चिराग तो अब खुद को मोदी का हनुमान बताने लगे हैं। वे नरेन्द्र मोदी के प्रति इतने श्रद्धावनत हैं कि उन्होंने कहा है, आप मेरी वजह से से किसी धर्मसंकट में न पड़े। नीतीश कुमार को संतुष्ट करने के लिए अगर मेरे खिलाफ कुछ बोलना हो तो नि:संकोच बोलें। नीतीश कुमार ने मेरे और प्रधानमंत्री के बीच दूरी पैदा करने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। लेकिन प्रधानमंत्री तो मेरे दिल में रहते हैं। जाहिर है चिराग भावनाओं को भुनाने के लिए इतनी इमोशनल बातें कर रहे हैं।

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