कौन हैं नरेंद्र नारायण यादव? नियुक्त किए गए बिहार का प्रोटेम स्पीकर, क्यों बेहद अहम है ये पद
Who is Narendra Narayan Yadav: नीतीश कुमार की जेडीयू पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेंद्र नारायण यादव को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 24 नवंबर (सोमवार) को नारायण यादव को स्पीकर पद की शपथ दिलाई है। स्पीकर बनने के बाद अब नरेंद्र नारायण यादव बिहार के नव-निर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में 74 वर्षीय नरेंद्र नारायण देव आठवीं बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने आलमनगर सीट से जीत हासिल की है। इस चुनाव में उन्होंने वीआईपी उम्मीदवार नबीन कुमार को बड़े अंतर से हराया। नरेंद्र नारायण यादव ने 55,465 वोटों के प्रभावशाली अंतर से जीत दर्ज की।

कौन हैें नरेंद्र नारायण?
नरेंद्र नारायण यादव ने पहली बार 1955 में आलमनगर सीट से विधायक के रूप में चुने गए थे और तब से लगातार इसी सीट से जीतते आ रहे हैं। नरेंद्र नारायण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद और करीबी नेताओं में से एक माना जाता है। यादव पहले भी बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
आजमनगर में नारायण यादव का है एक छत्र राज
आलमनगर विधानसभा सीट पर 1995 के बाद नरेंद्र नारायण यादव इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे। जनता दल और फिर जेडीयू के टिकट पर लगातार आठ बार विधायक बनकर रिकॉर्ड बनाया।
- 1952 के पहले चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के तनुका लाल यादव विधायक बने।
- 1957 से 1972 तक कांग्रेस के यदुनंदन झा और विद्याकर कवि ने लगातार पांच बार यहां से चुनाव जीता।
- 1977 से 1990 के बीच बीरेंद्र कुमार सिंह ने जनता पार्टी, लोकदल और जनता दल के टिकट पर लगातार चार बार इस सीट पर कब्जा जमाया था।
- 1995 से जेडीयू के नरेंद्र नारायण ने इस सीट पर कब्जा जताया है।
प्रोटेम स्पीकर की मुख्य जिम्मेदारियां
- बिहार विधान सभा में प्रोटेम स्पीकर का पद अस्थायी होता है, लेकिन उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
- विधानसभा के नए कार्यकाल की शुरुआत में, प्रोटेम स्पीकर सभी नवनिर्वाचित विधायकों को सदस्यता की शपथ दिलाते हैं।
- जब तक स्थायी स्पीकर का चुनाव नहीं हो जाता, सदन की प्रारंभिक कार्यवाही प्रोटेम स्पीकर के अधीन ही चलती है।
- स्थायी स्पीकर के चुनाव/चयन की पूरी प्रक्रिया का संचालन भी वही करते हैं।
- जैसे ही शपथ ग्रहण पूरा हो जाता है, सदन की शुरुआती बैठकें-जब तक स्थायी स्पीकर न चुन लिए जाएँ-प्रोटेम स्पीकर ही संचालित करते हैं।
- शुरुआती बैठकों में सदन का अनुशासन, प्रक्रिया, और मर्यादा बनाए रखना प्रोटेम स्पीकर की जिम्मेदारी होती है।
- कई बार नए विधायक पहली बार सदन में आते हैं; प्रोटेम स्पीकर उन्हें सदन की प्राथमिक कार्यप्रणाली से अवगत कराने की भूमिका भी निभाते हैं।
- नए कार्यकाल की शुरुआत से जुड़े आवश्यक कागजी औपचारिकताओं को पूरा कराने में भी प्रोटेम स्पीकर की भूमिका होती है।
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