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Sanjay Saraogi: कौन हैं संजय सरावगी, जो बने बिहार BJP के अध्यक्ष, 2005 से हैं MLA, कैसे तय किया सियासत का सफर

Bihar BJP President Sanjay Saraogi: बिहार की राजनीति में बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने 15 दिसंबर को दरभंगा से विधायक संजय सरावगी को बिहार भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। संजय सरावगी को तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया गया है।

वैश्य समाज के प्रमुख नेता के रूप में पहचान रखने वाले संजय सरावगी फरवरी 2005 से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं। दरभंगा शहरी सीट पर उनकी राजनीतिक पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। इससे पहले वे एनडीए सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं, जिससे उन्हें शासन और संगठन दोनों का अच्छा अनुभव मिला है। संजय सरावगी के नाम की घोषणा होते ही बिहार के सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कौन हैं संजय सरावगी और कैसे बना उनका राजनीतिक कद।

who is Sanjay Saraogi

भाजपा के भीतर संजय सरावगी को वैश्य समाज के प्रभावशाली और भरोसेमंद चेहरे के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में उनका बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनना सामाजिक संतुलन और चुनावी रणनीति, दोनों ही नजरिए से अहम माना जा रहा है। यह बदलाव उस समय हुआ है जब नितिन नबीन को पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों से बिहार भाजपा के संगठन में नई ऊर्जा और कार्यकर्ताओं में ताजगी आएगी।

🟡 who is Sanjay Saraogi: कौन हैं संजय सरावगी?

🔹 संजय सरावगी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और दरभंगा सदर से 2005 से लगातार विधायक रह चुके हैं। वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और संगठन व सरकार दोनों का लंबा अनुभव रखते हैं।

🔹 संजय सरावगी का जन्म 28 अगस्त 1969 को बिहार के दरभंगा में हुआ था। वे कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएट (M.Com) हैं और उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई भी की है। उन्होंने साल 1993 में एल.एन. मिथिला विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई पूरी की है। संजय सरावगी मारवाड़ी हैं और वैश्य समुदाय से आते हैं। संजय सरावगी की पत्नी का नाम शोभा सरावगी है।

🔹 संजय सरावगी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। वे करीब 10 सालों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से सक्रिय रूप से जुड़े रहे और इस दौरान कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं।

MLA Sanjay Saraogi

🔹 संजय सरावगी वर्ष 1999 में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिला मंत्री बने। 2001 में दरभंगा नगर मंडल भाजपा के अध्यक्ष नियुक्त हुए। 2002 में दरभंगा नगर निगम के वार्ड संख्या-6 से पार्षद चुने गए। 2003 में उन्होंने दरभंगा जिला भाजपा के महामंत्री के रूप में भी काम किया।

🔹 फरवरी 2005 में संजय सरावगी ने पहली बार दरभंगा सदर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर बिहार विधानसभा में प्रवेश किया। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार मोहम्मद मुमताज को 14,188 मतों से हराया था। अक्टूबर 2005 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मदन मोहन झा को 24,983 मतों के बड़े अंतर से हराया।

🔹 इसके बाद संजय सरावगी फरवरी 2005, अक्टूबर 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार विधायक चुने गए। 2010 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आरजेडी के सुल्तान अहमद को 27,554 मतों से हराया। 2015 में ओम प्रकाश खेरिया और 2020 में अमरनाथ गामी को पराजित कर अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के उम्मीदवार उमेश सहनी को 24,593 मतों से शिकस्त दी।

🔹साल 2017 में संजय सरावगी बिहार विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा वे बिहार प्रदेश भाजपा गौवंश प्रकोष्ठ के संयोजक रह चुके हैं। पार्टी संगठन में उन्होंने राज्य कार्यसमिति सदस्य सहित कई अहम पदों पर काम किया है।

Sanjay Saraogi Net Worth

🟡 Sanjay Saraogi Net Worth: संजय सरावगी की संपत्ति

चुनावी हलफनामों के मुताबिक संजय सरावगी की कुल संपत्ति 7 करोड़ रुपये है। संजय सरावगी पर 88 लाख रुपये का लोन है। इनके पास एक लाख रुपये कैश है। 33 लाख रुपये बैंक में है। उनके पास 2 करोड़ का नॉन एग्री कल्चर लैंड भी है।

🟡 क्यों खास है भाजपा का यह फैसला

भाजपा नेतृत्व का मानना है कि संजय सरावगी का अनुभव, संगठनात्मक समझ और चुनावी रिकॉर्ड पार्टी को बिहार में मजबूती देगा। दरभंगा जैसे अहम क्षेत्र से आने वाले नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने यह संकेत भी दिया है कि आगामी चुनावों में क्षेत्रीय संतुलन और मजबूत संगठन उसकी प्राथमिकता है।

🟡 आगे की चुनौती

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद संजय सरावगी के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2025 के विधानसभा चुनाव हैं। संगठन को एकजुट रखना, कार्यकर्ताओं में जोश भरना और विपक्ष के हमलों का जवाब देना उनकी प्राथमिकता होगी। अब देखना होगा कि बिहार भाजपा की कमान संभालने के बाद वे पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं और चुनावी मैदान में कितना असर दिखा पाते हैं।

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