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Unique Marriage Tradition: शादी के लिए लड़के के घर में नाव होना ज़रूरी, जानिए क्या है शादी से नाव का कनेक्शन ?

Unique Marriage Tradition: ग्रामीणों की मानें तो 4 महीने तक आवाजाही का ज़रिया सिर्फ नाव ही होता है, गांव की सड़के बाढ़ की चेपट में रहती है। बिना नाव के कहीं भी आना जाना मुमकिन नहीं हो पाता है। ज्यादातर लोग अपने घरों...
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Unique Marriage Tradition: शादी का सीज़न शुरू हो चुका है, बिहार के विभिन्न ज़िलों से शादी की कई रोचक खबरें देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में आज हम आपको बिहार के कटिहार जिले के गांवों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां शादी के लिए घर में नाव होना ज़रूरी है। जिस घर में नाव नहीं होती है वहां लोग अनी बेटी की शादी करने से ऐतराज़ करते हैं। ज़्यादातर देखा गया है कि जिस घर में नाव होती है, लड़की के पिता उसी घर के लड़के से अपनी बेटी की शादी करवाते हैं। जिस घर में नाव नहीं होती है वहां रिश्ता नहीं जोड़ते हैं। चौक चामा, रदेव टोला, भगवान टोला, मेघु टोला, घीसु टोला, लक्खी टोला, गदाई दियारा, नया टोला गोविंदपुर, गोविंदपुर बाहर साल, गोपी टोला, भारत टोला, घेरा गांव, कीर्ति टोला और मुरली राम टोला में यह परंपरा काफी दिनों से निभाई जा रही है।

शादी के लिए लड़के के घर में नाव होना ज़रूरी

शादी के लिए लड़के के घर में नाव होना ज़रूरी

आपको यह सुनकर लग रहा होगा कि यह किसी फिल्म का स्क्रिप्ट है, लेकिन नहीं कटिहार ज़िले के अमदाबाद प्रखंड में 14 गांव ऐसे हैं जहां शादी के लिए नाव वाली परंपरा निभाई जा रही है। लड़की वाले रिश्ता लेकर लड़के के घर जाते हैं, लड़का पसंद होने पर उसे तोहफे नाव भी देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रखंड से होकर महानंदा और गंगा नदी गुज़रती है। इस वजह से साल में साल में 4 महीने तक उनके गांव बाढ़ की गिरफ्त में रहते हैं। बाढ़ की वजह से आवागमन में काफी परेशानी होती है। इसलिए बेटी वाले शादी से पहले नाव होना शर्त रखते हैं, ताकि उनकी बेटी को आवागमन में परेशानी नहीं हो।

नाव नहीं होने की वजह से टूट गया था रिश्ता

नाव नहीं होने की वजह से टूट गया था रिश्ता

ग्रामीणों की मानें तो 4 महीने तक आवाजाही का ज़रिया सिर्फ नाव ही होता है, गांव की सड़के बाढ़ की चेपट में रहती है। बिना नाव के कहीं भी आना जाना मुमकिन नहीं हो पाता है। ज्यादातर लोग अपने घरों में आवाजाही के लिए लकड़ी या टीन की नाव रखते हैं। स्थानीय निवासी ने बताया की एक बार एक परिवार का रिश्ता सिर्फ इस वजह से टूट गया क्योंकि घर में नाव नहीं थी। मेघु टोला गांव के निवासी भोला सिंह के अपनी बेटी का रिश्ता लेकर लड़की वाले आये, उन्हें सबकुछ भाया लेकिन घर में नाव नहीं थी तो शादी की बात ही खत्म हो गई।

नाव होने पर ही होती है शादी

नाव होने पर ही होती है शादी

भोला सिंह के पोते का रिश्ता मनसाही प्रखंड के बंगुरी टाल से लड़की वाले लेकर आए थे। सबकुछ पसंद आने के बाद रिश्ता फाइनल होने वाला था, उसी समय लड़की वाले ने घर में नाव होने की बात पूछी, जब पता चला की नाव नहीं है तो उन्होंने रिश्ता नहीं किया और वापस चले गए। भगवान टोला के निवासी रतन सिंह ने बताया कि उनके बेचे की शादी मथुरापुर (पश्चिम बंगाल) में हुई है। बेटे के रिश्ते के वक्त लड़की के परिजनों ने ग्रामीणों से मेरे घर मंर नाव है या नहीं, इसकी जानकारी ली। जिसके बाद पता चला कि मेरे पास नाव नहीं है। लड़की वालों को लड़का काफी पसंद था इसलिए उन्होंने शादी से पहले लड़के को नाव तोहफे में दिया और फिर शादी हुई।

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English summary
Unique Marriage Tradition In Bihar, Amdabad Block Katihar News In Hindi
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