बिहार में 'द कश्मीर फाइल्स' के 'सरकारी' टिकट पर पंगा, खूब हुआ हंगामा
पटना, 28 मार्च: बिहार विधानसभा में सोमवार को फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को लेकर खूब हंगामा हुआ और विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही तक रोकनी पड़ गई। दरअसल, विपक्षी सदस्यों ने सदन के वेल में आकर फिल्म का टिकट फाड़ना शुरू कर दिया था। विधानसभा अध्यक्ष लगातार विपक्षी विधायकों से ऐसा आचरण नहीं करने के लिए कह रहे थे, लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं थे। दरअसल, बिहार सरकार ने विधायकों और मंत्रियों को कश्मीरी पंडितों के साथ हुए जुल्म पर बनी फिल्म को देखने के लिए मुफ्त टिकट उलब्ध करवाया था, लेकिन बिना फिल्म देखे विपक्ष इसे बीजेपी का ऐजेंडा बताने लगा और इसी को लेकर विधानसभा में खूब हंगामा हुआ। दूसरी तरह यह फिल्म अब तेजी से 250 करोड़ के क्लब की ओर बढ़ चली है।

'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म पर बिहार विधानसभा में हंगामा
बिहार विधानसभा में सोमवार को विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' के खिलाफ विपक्षी विधायकों ने बड़ा सीन क्रिएट कर दिया। राज्य सरकार की ओर से 'द कश्मीर फाइल्स' के टिकट मुफ्त में बांटे गए थे, लेकिन विपक्ष के विधायकों ने सदन में इसपर भारी हंगामा किया और वेल में घुसकर इसके टिकट फाड़कर उछालना शुरू कर दिया। बिहार सरकार कश्मीरी पंडितों के साथ कश्मीर में 1990 में हुई बर्बरता पर बनी फिल्म को पहले ही टैक्स फ्री कर चुकी थी। उसके बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने 17 मार्च को सभी विधायकों को यह फिल्म देखने के लिए भी आमंत्रित किया था। गौरतलब है कि कश्मीरी पंडितों के साथ हुई ज्यादती पर बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाका मचाए हुए।

'यह नफरत का टिकट है'
दरअसल, सोमवार को विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल और सीपीआई-एमएल के विधायक फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' का विरोध करने की तैयारी करके सदन में आए थे। वे सदन के वेल में दाखिल हो गए और टिकटों को फाड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा लगातार उनसे कहते रहे कि अपनी सीट पर जाएं और इस फिल्म को देखने के बाद ही इसपर कोई टिप्पणी करें। लेकिन, सीपीआई-एमएल विधायक मेहबूब आलम ने कहा कि 'यह नफरत का टिकट है। फिल्म में मुसलमानों को टारगेट किया है।' राजद विधायक राकेश रोशन और रामप्रीत सदा ने कहा, 'इस तरह की फिल्मों के जरिए सरकार समाज को क्या संदेश देना चाहती है?'(हंगामें की तस्वीर-वीडियो से)

पहले फिल्म देखें, तभी आलोचना करें- उपमुख्यमंत्री
हंगामें के बीच स्पीकर ने आधे घंटे के लिए सदन को स्थगित भी कर दिया, लेकिन विपक्षी विधायकों ने सदन के बाहर भी अपना विरोध जारी रखा। सीपीआई-एमएल के विधायक अजीत कुशवाहा ने कहा कि 'यह भाजपा की ओर से अपने सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की एक चाल है। इससे पहले कभी भी सरकार की ओर से फिल्म को प्रमोट करने की ऐसी कोशिश नहीं देखी गई है।' लेकिन, उपमुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारी विधायकों से आग्रह किया कि 'एक अच्छे विचार से बनी फिल्म के बारे में कोई पूर्वकल्पित धारणा न बनाएं।' वो बोले, उन्होंने कहा कि इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पास किया है और थियेटरों में कई दिनों से चल रही है। 'अगर फिल्म को देखने के बाद भी आपको लगता है तो आप इसकी आलोचना के लिए स्वतंत्र हैं।'

एजेंडा के तहत हो रहा है विरोध- सत्ता पक्ष
हालांकि, सत्ताधारी दल के बाकी मंत्रियों और बीजेपी विधायकों जिबेश कुमार और प्रमोद कुमार ने कहा कि फिल्म में 'कड़वी सच्चाई दिखाई गई है और विपक्षी सदस्य एजेंडा के तौर पर इसका विरोध कर रहे हैं।' प्रमोद कुमार बोले, 'फिल्म को लेकर उनके विरोध का सामान्य देशभक्त नागरिकों की ओर से इसकी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।' इससे पहले कई बीजेपी नेता और कार्यकर्ता सिनेमा घरों में जाकर यह फिल्म देख चुके हैं।
सोमवार सुबह तक की कमाई- 228.18 करोड़ रुपये
देश में एक खास वर्ग को छोड़ दें तो यह फिल्म सफलता की कसौटी पर पूरी तरह से खरी उतर रही है। कम बजट की फिल्म होने के बावजूद यह फिल्म तेजी से 250 करोड़ की कमाई को छूने की ओर बढ़ रही है। मूवी क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने सोमवार सुबह ट्वीट करके इसके बारे में बताया कि यह अभी तक 228.18 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी है।












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