IT अधिकारियों के सामने झूठ बोले थे तेजस्वी! जा सकती है विधानसभा की सदस्यता

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का परिवार दिन पर दिन राजनीतिक दलदल में फंसता नजर आ रहा है और हर रोज उनके खिलाफ कानून अपना शिकंजा कसते जा रहा है।

पटना। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का परिवार दिन पर दिन राजनीतिक दलदल में फंसता नजर आ रहा है और हर रोज उनके खिलाफ कानून अपना शिकंजा कसते जा रहा है। एक तरफ जहां सीबीआई अधिकारी रेलवे टेंडर घोटाले में पूछताछ करने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ इनकम टैक्स विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पटना में तेजस्वी यादव से पूछताछ के दौरान गलत जानकारी दी थी और जांच के दौरान गड़बड़ी भी सामने आई थी। बिहार के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह अन्य कंपनी के निदेशक के रूप में काम करते थे और चेक काटते थे। ऐसा कहा जा रहा है कि उप मुख्यमंत्री पद पर तैनात तेजस्वी यादव एपी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड मे लाभ का पद संभाल रहे थे जिससे उनकी विधानसभा सदस्यता जा सकती है।

IT अधिकारियों के सामने झूठ बोले तेजस्वी! खतरे में विधायकी

जानकारी के अनुसार आयकर विभाग के द्वारा बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की बेनामी तरीके से अर्जित दिल्ली की करोड़ों संपत्ति को न केवल जब्त किया गया है बल्कि उनकी धोखाधड़ी भी पकड़ा गया है। आयकर विभाग के अन्वेषण निदेशालय की 8 सितंबर 2017 की 80 पन्ने की जांच रिपोर्ट में विस्तार से इस संबंध में चर्चा किया गया है। इस जांच रिपोर्ट में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए बड़े-बड़े ठेकों को हासिल करने और नामी-गिरामी रियल स्टेट कंपनी के साथ-साथ दर्जनों छोटी बड़ी कंपनियों की गड़बड़ियों का विवरण दिया गया है।

दूसरी तरफ तेजस्वी यादव के खिलाफ जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि वह एबी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के 98 प्रतिशत शेयर हासिल करने वाले थे लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद शपथ ग्रहण से पहले 9 नवंबर 2015 को कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। एबी एक्सपोर्ट के 98 प्रतिशत शेयर के मालिक होने के नाते हुए 10 जनवरी 2011 से ही इसके डायरेक्टर थे लेकिन बिहार के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह कंपनी में निदेशक के पद पर काम कर रहे थे और इस दौरान कई चेक भी उन्होंने जारी किया है। लालू यादव के खास कहे जाने वाले सांसद प्रेम चंद्र गुप्ता के एक कर्मचारी विजय पाल त्रिपाठी के आवास पर हुई छापेमारी में तेजस्वी यादव के हस्ताक्षर से 9 फरवरी 2016 को मेसर्स ओलिव ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स नक्षत्र बिजनेस लिमिटेड और मेसर्स यश वी ज्वेल प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए चेक मिले हैं। चेक मिलने से यह बात स्पष्ट हो गई है कि कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा देने के बाद भी तेजस्वी यादव कंपनी का काम-काज करते थे और लाभ के भागीदार थे।

वहीं आयकर विभाग की रिपोर्ट में ऐसा कहा गया है कि तेजस्वी यादव को जब 29 अगस्त 2017 को पटना के आयकर भवन में पूछताछ के लिए बुलाया गया था तो एक सवाल के जवाब में गलत जानकारी दी थी और कहा था कि एवी एक्सपोर्ट की लेखा-बही कंपनी के दिल्ली के रजिस्ट्रार ऑफिस में ही रखी है लेकिन 16 मई 2017 को दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित कंपनी के रजिस्ट्रार ऑफिस में हुई छापेमारी के दौरान फाइल नहीं मिला। इस तरह जब उनसे दूसरा सवाल पूछा गया कि अमित कत्याल कौन सा काम करते थे तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए। कॉरपोरेट मंत्रालय के रिकॉर्ड बताते हैं कि वह कंपनी की ओर से हस्ताक्षर के लिए अधिकृत व्यक्ति हैं, बिजली कनेक्शन के आवेदन पर उन्होंने खुद हस्ताक्षर किए थे।

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