बिहार: नीतीश कुमार के साथ गठबंधन को लेकर तेजस्वी का बड़ा बयान
पटना, 27 मई: लंदन से लौटे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गुरुवार को लालू प्रसाद यादव के ठिकानों पर की गई छापेमारी को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। इसके साथ ही तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव के घोर विरोधी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से तालमेल करने की लग रही अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। तेजस्वी ने नीतीश कुमार के साथ सरकार बनाने की खबरों को काल्पनिक करार दिया है।

तेजस्वी यादव से जब पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार के जीतने पर राजद राज्य में सरकार बनाएगी तो इस पर बिहार के नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, , जब हम जातीय जनगणना की मांग को लेकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे, तो पहल मेरी थी न कि नीतीश जी की। क्या इसका मतलब यह है कि मैं भाजपा के साथ गठबंधन के लिए तैयार हूं।
शाम सात बजे पटना एयर पोर्ट पहुंचे तेजस्वी यादव ने सीबीआई के छापे के लिखाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब तक सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग होता रहेगा ऐसे ही छापे मारे जाते रहेंगे। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हमने बचपन से इस तरह के छापे देखे हैं। छापेमारी की कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिशोध का कायरतापूर्ण कार्य न तो पहली बार किया गया है और न ही यह आखिरी है।
हाल में राबडी देवी ने पटना स्थित आवास में आयोजित इफ्तार पार्टी आयोजित की थी जिसमें नीतीश कुमार अपने आवास से पैदल चलकर आए थे। इसी प्रकार जदयू मुख्यालय में आयोजित इफ्तार पार्टी में जब तेजस्वी शामिल होकर लौट रहे थे तब नीतीश कुमार उन्हें वाहन तक छोडने आए थे। जातीय जनगणना को लेकर दोनों नेताओं ने एकांत में मुलाकात की थी। इन घटनाक्रम के बाद दोनों दलों के बीच तालमेल होने की अटकले लगने लगी थी।
इस बारे में पूछे जाने पर तेजस्वी ने कहा कि यह 'काल्पनिक' है। उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं के आरोपों पर टिप्पणी करने से भी इनकार कर दिया कि छापे भाजपा प्रायोजित थे और इसका उद्देश्य नीतीश कुमार को विपक्षी दल राजद के करीब आने से रोकना था। उन्होंने कहा कि उनके पिता पर रेलमंत्री रहने के दौरान कथित भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है जबकि उनके कार्यकाल के दौरान रेलवे को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाने के साथ गरीबों के लिए एसी ट्रेन चलाई गई, कुलियों को नौकरी दी गई और कुल्हड़(मिट्टी के बर्तन) में चाय की शुरूआत की गई।












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