Bihar Politics: 'तेजस्वी के लिए तड़पता बिहार' पोस्टर से चढ़ा सियासी पारा, RJD-JDU का भविष्य क्या?
Tejashwi Yadav Poster Politics: बिहार में आगामी चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी जंग जारी है। वहीं अब 'तेजस्वी के लिए तड़पता बिहार' वाले पोस्टर पर सियासी चर्चा शुरू हो गई है। राजधानी पटना स्थित राजद मुख्यालय के बाहर यह बोर्ड लगा है।
तेजस्वी यादव के पोस्टर पर बिहार में सियासत तेज़ हो चुकी है, सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि तेजस्वी यादव बिहार के डिप्टी सीएम हैं तो फिर उन्हें क्या मुख्यमंत्री बनाने के लिए राजद नेता और कार्यकर्ता तड़प रहे हैं। पोस्टर पॉल्टिक्स के बाद राजद-जदयू का क्या भविष्य है।

बिहार में जब सीएम नीतीश कुमार ने NDA का दामन थामा था, उस वक्त से ही यह चर्चा होने लगी थी कि प्रदेश की कमान अब तेजस्वी यादव को मिलनी चाहिए, नीतीश कुमार कब पलटी मारेंगे, कोई नहीं जानता है। तेजस्वी यादव को सीएम प्रोजेक्ट करने के लिए राजद नेता और कार्यकर्ता कुछ ना कुछ दांव खेलते ही रहे हैं।
'तेजस्वी के लिए तड़पता बिहार' वाले पोस्टर से एक फिर से प्रदेश में तेजस्वी को सीएम बनाने की ओर उठती आवाज़ से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि बिहार में रोज़गार देने के मुद्दे को राजद पूरी तरह से अपनी उपलब्धि बता रही है।
उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि बिहार में जितने युवाओं को नौकरी दी जा रहीं हैं, वह किसी और प्रदेश में नहीं दी जा रही है। रोज़गार के मुद्दे को तेजस्वी यादव कैश करवाते हुए युवाओं में अपनी लोकप्रियता भी बढ़ाते नज़र आ रहे हैं।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी सियासी मोड में पूरी तरह एक्टिव होते हुए तेजस्वी को सीएम बनाने की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। प्रदेश के सियासी समीकरण की बात करें तो बिहार में सबसे ज्यादा विधायक राजद के हैं। जातीय आधारित गणना रिपोर्ट में भी यादवों की तादाद ज्यादे हैं, ऐसे में सीएम चेहरे के तौर पर मज़बूत नज़र आ रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि सीएम तेजस्वी बनेंगे तो जदयू और नीतीश कुमार का भविष्य क्या है। विपक्षी एकता को मज़बूत करने की कवायद तेज़ कर चुके सीएम नीतीश कुमार को लेकर यह चर्चा हो रही थी कि वह राज्य से नहीं अब केंद्र की सियासत करेंगे, लेकिन इस मामले में अभी भी संशय बरकरार है।
सीएम नीतीश कुमार ने जब पहली बार भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट करने की मुहिम छेड़ी थी, तो यह लगा था कि विपक्षी एकता मज़बूत करने में नीतीश कुमार बतौर संयोजक की भूमिका निभाएंगे। विपक्षी एकता 'INDIA गठबंधन' बन गया। कई बैठकें भी हो गईं लेकिन संयोजक पद के नाम पर मुहर नहीं लगी। पद अभी भी खाली है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नेशल लेवल पर अपनी मौजूदगी दर्ज करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। वह लगातार खुद को राष्ट्रीय स्तर पर पेश करते हुए नज़र आ रहे हैं। 'INDIA गठबंधन' की बैठक को लेकर कोई अपडेट नहीं है, इससे भी नीतीश कुमार की बेचैनी बढ़ती हुई नज़र आ रही है। विभिन्न प्रदेशो में हो रहे चुनावों में नज़र बनाए हुए हैं।
नीतीश कुमार की गतिविधि यही बता रही है कि अब राज्य से ज्यादा केंद्र की सियासत में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इशारों इशारों में कई बार वह तेजस्वी यादव को आगे करते हुए नज़र आए हैं। लेकिन अगर वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हुए तो फिर बिहार में क्या होगा?
इस पूरे मामले में सियासी जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार अगर केंद्र की सियासत में कामयाब नहीं हुए तो, वह बिहार में राजद से अलग होते हुए अपनी पार्टी की सियासी ज़मीन मज़बूत करेंगे। ख़ुद को ही सीएम पद का दावेदार बनाते हुए, उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव के रण में कूदेगी।












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