Tej Pratap Yadav के दही चूड़ा भोज में तेजस्वी और नीतीश कुमार को न्योता, फिर साथ आएंगे लालू के दोनों बेटे?
Tej Pratap Yadav News: बिहार की राजनीति में मकर संक्राति बहुत खास मौका होता है। इस दिन प्रदेश के कई दिग्गज नेता दही चूड़ा भोज का आयोजन करते हैं। प्रदेश के सियासी समीकरण भी इस भोज से बदलते-बिगड़ते देखे गए हैं। दशकों तक लालू यादव के आवास पर दो दिनों तक इस भोज का आयोजन होता था। अब उनके बेटे तेजप्रताप यादव इस सिलसिला को आगे बढ़ाते नजर आएंगे। खबर है कि इस साल लालू के बड़े बेटे ने दही चूड़ा भोज के आयोजन का फैसला लिया है।
तेज प्रताप यादव पारंपरिक दही-चूड़ा भोज आयोजित करेंगे। इसमें अपने छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी न्योता दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी आमंत्रित किया गया है। तेज प्रताप के इस कदम को सियासी और पारिवारिक दोनों नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है।

Tej Pratap Yadav के दही चूड़ा भोज में छिपे सियासी समीकरण
दरअसल, मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित होने वाला दही चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में एक सांकेतिक उत्सव जैसा है। हर साल इस भोज के जरिए राजनीतिक संदेश भी दिए जाते हैं। परिवार और पार्टी से बेदखल किए जाने के बाद तेजस्वी यादव इस वक्त राजनीतिक वनवास के दौर में हैं। महुआ से चुनाव हारने के बाद से वह लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। दूसरी ओर तेजस्वी यादव भी अपने करियर के मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को सिर्फ 25 सीटें मिली हैं। इस भोज में अगर दोनों भाई साथ जुटते हैं, तो फिर से लालू परिवार के एक होने की सुगबुगाहट शुरू हो जाएगी।
बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार को भी तेजप्रताप ने न्योता दिया है। अब देखना है कि उनके इस भोज में सीएम शामिल होते हैं या नहीं। इससे पहले चिराग पासवान भी अपने आवास पर मकर संक्रांति पर भोज का आयोजन कर चुके हैं। लालू यादव ने लंबे समय तक अपने घर पर लगातार दो दिन भोज का आयोजन किया है।
RJD समर्थकों को भी परिवार के एकजुट होने की उम्मीद
आरजेडी समर्थकों को उम्मीद है कि दही-चूड़ा भोज बहाने तेजस्वी और तेज प्रताप के बीच जमी बर्फ पिघलेगी। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से लालू यादव के परिवार में कलह मची हुई है। उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने खुलकर तेजस्वी और उनके करीबी संजय यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तेजस्वी चुनाव नतीजों के बाद विदेश चले गए थे और इसी सप्ताह लौटकर आए हैं। आरजेडी के समर्थकों को भी उम्मीद है कि परिवार एक बार फिर एकजुट होगा और पार्टी को भी मजबूती मिलेगी। अगर दही चूड़ा भोज के साथ ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में नए अध्याय की तरह होगा।












Click it and Unblock the Notifications