Munna Shukla Life Imprisonment: ‘फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं’ SC ने शुक्ला की उम्रक़ैद की को बरक़रार

Munna Shukla Life Imprisonment: विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला को बिहार के पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या से संबंधित कानूनी लड़ाई में बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्ला की आजीवन कारावास की सजा को बरक़रार रखा है। शुक्ला और मंटू तिवारी को पिछले साल तीन अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने दोषी ठहराया था।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, संजय कुमार और आर महादेवन की पीठ ने शुक्ला की समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए दलील दी कि 3 अक्टूबर के फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं है। आपको बता दें कि पूर्व भाजपा सांसद रमा देवी के पति बृज बिहारी प्रसाद की हत्या एक ऐसा मामला है जिसने बिहार और उत्तर प्रदेश पुलिस बल दोनों को गहराई से प्रभावित किया है।

Munna Shukla Life Imprisonment

बिहारी प्रसाद की हत्या गोरखपुर के गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला ने की थी, जिसकी खुद उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी दोनों के खिलाफ हत्या के आरोप, साथ ही प्रसाद के अंगरक्षक लक्ष्मेश्वर साहू की हत्या की कोशिश साफ तौर पर साबित थे।

मामले की विस्तृत जांच में, सुप्रीम कोर्ट ने प्रसाद की हत्या की साजिश और उसे अंजाम देने में शुक्ला और तिवारी की संलिप्तता पाई। पीठ ने मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी के खिलाफ हत्या के प्रयास के आरोपों की भी पुष्टि की। कार्यवाही के दौरान, दो अन्य आरोपियों- भूपेंद्र नाथ दुबे और कैप्टन सुनील सिंह की मृत्यु हो गई। ग़ौरतलब है कि मंटू तिवारी रमा देवी के राजनीतिक विरोधी देवेंद्रनाथ दुबे के रिश्तेदार हैं।

चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी ने देवेंद्रनाथ दुबे को राजद की रमा देवी के खिलाफ मैदान में उतारा था। 23 फरवरी 1998 को मोतिहारी लोकसभा सीट पर पुनर्मतदान से एक दिन पहले देवेंद्रनाथ दुबे की हत्या कर दी गई थी। इस घटना में बृज बिहारी प्रसाद और अन्य को फंसाया गया था।

7 मार्च 1999 को यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। एजेंसी ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह और तीन अन्य पर साजिश रचने का आरोप लगाया। कथित तौर पर, 13 जून 1998 को प्रसाद की हत्या से पहले पटना की बेउर जेल में सूरजभान सिंह, मुन्ना शुक्ला, लल्लन सिंह और राम निरंजन चौधरी के बीच एक बैठक हुई थी।

24 जुलाई 2014 को हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया। इसने 12 अगस्त 2009 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलट दिया, जिसमें सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 1998 में बृज बिहारी प्रसाद की पटना में हिंसक हत्या कर दी गई। उनकी मृत्यु उस समय बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण क्षण था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+