Success Story: पिता मज़दूर और मां चराती हैं बकरी, आर्थिक तंगी को मात देते हुए बेटा बना अधिकारी
Success Story: इंसान मेहनत और लगन से अपने सपनों को साकार कर सकता है। पश्चिम चंपारण के रहने वाले जय शाह ने इस बात को साबित कर दिखाया है। उन्होंने आर्थिक तंगी को मात देते हुए कामयाबी का परचम लहराया है।

Success Story : इंसान के अंदर कुछ करने का जज्बा हो और उसने मेहनत और लगन से तैयारी की तो कामयाबी ज़रूर मिलती है। इस वाक्य को पश्चिम चम्पारण के रहने वाले 26 वर्षीय जय शाह ने सही साबित कर दिखाया है। मझौलिया प्रखंड के जौकटिया पंचायत (वार्ड-6) निवासी कन्हैया साह के बेटे की कामयाबी पर पूरे गांव वाले को फख्र है। जय शाह के पिता पेशे से बढ़ई हैं, वह अभी भी मज़दूरी कर परिवार की ज़िम्मेदारियों को उठा रहे हैं। वहीं उनके बड़े बेटे जय शाह ने आर्थिक तंगी को मात देते हुए कामयाबी का परचम लहराया है। ग्रामीणों ने कहा कि जय शाह ने अपने सपनों को साकार करने के लिए काफी मेहनत की है। वह चार साल से घर नहीं आए और परीक्षा की तैयारी में जुटे रहे। उनकी कामयाबी से पूरे ज़िले का नाम रोशन हुआ है।

मुश्किलों में गुज़रा जय शाह का बचपन
जय शाह की मां बकरी चराती हैं, बहुत ही मुश्किलों का सामना करते हुए उन्होंने बच्चों को परवरिश किया। उनकी मां को यह तक नहीं पता कि उनके बेटे ने कौन सी परीक्षा पास की है। मीडिया से मुखातिब होते हुए बस उन्होंने कहा कि बेटे ने बड़ा परीक्षा पास किया है, अब वह अधिकारी बन जाएगा। जयप्रकाश ने यूपीएससी के तहत होने वाले इंडियन स्टैटिकल सर्विस (ISS) की परीक्षा में कामयाबी हासिल की है। उनका ऑल इंडिया रैंक 27 है। देश के विभिन्न ज़िलों से कुल 29 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।

मैट्रिक पास करने के बाद किया पटना का रुख
जयप्रकाश साह ने बहुत ही मुश्किल से तैयारी कर तीसरे प्रयास में कामयाबी हासिल की है। मीडिया से मुखातिब होते हुए जय शाह ने बताया कि दो साल तक उनकी ट्रेनिंग होगी। ट्रेनिंक मुकम्मल होने के बाद किसी मंत्रालय में उन्हें पदभार मिलने की उम्मीद है। जयशाह ने किस तरह से यहां तक का सफर पूरा किया, उससे भी हम आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं। साल 2012 में उन्होंने अपने गांव से ही मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने पटना का रुख किया। वहां उन्होंने साइंस कॉलेज में एडमिशन लिया।
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तीसरी कोशिश में मिली कामयाबी
साइंस कॉलेज पटना से पढ़ाई मुकम्मल करने के बाद उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया। दिल्ली यूनिवर्सिटी से MAC की डिग्री हासिल की। यहां तक के सफर में उन्होंने अपने पिता जी से आर्थिक मदद ली। उसके बाद उन्होंने बतौर फ्रीलांसर एक कंपनी के साथ काम करते हुए पढ़ाई के साथ अपना खर्च निकालना शुरू किया। जय शाह ने एक गोल सेट कर लिया था कि उन्हें ISS एग्जाम को क्रैक करना है। तीसरी बार कोशिश करने के साथ ही उन्हों कामयाबी भी मिल गई। 4 साल से उन्होंने अपने घर की शक्ल नहीं देखी, सिर्फ इस वजह से की उन्हें अपने सपने को साकार करना था। आज वह कामयाबी हासिल कर काफी खुश हैं, वहीं उनके परिवार में भी खुशी की लहर है।
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