संघर्ष भरी है बिहार के अंगद राज की कहानी, ट्रेन में पढ़ाई कर पूरा किया सपना, 5 सरकारी नौकरी में हुआ चयन
Success Story Bihar: 'लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती' कविता की ये पंक्तियां बिहार के लाल अंगद राज पर बिल्कुल सही बैठती है। बिहार के आरा के रहने वाले अंगद राज एक नहीं, बल्कि पांच सरकारी नौकरी परीक्षाओं को पास करने में सफल रहे हैं।
बिहार के आरा के उदवंत नगर गांव के रहने वाले अंगज राज को शुरुआत में रेलवे में ग्रुप डी श्रेणी में नौकरी मिल गई थी। लेकिन अब उन्हें राज्य के सहायक सचिवालय के पद पर नियुक्त किया गया है। अंगद राज की कहानी संघर्ष भरी है और हजारों युवाओं को प्रेरित करने वाली है।

गरीब किसान परिवार से संबंध रखते हैं अंगद
अंगद बिहार के गरीब परिवार से हैं और उनका बचपन हमेशा संघर्ष से भरा रहा है। अंगद के पिता रमाशंकर सिंह पैतृक गांव में किसान थे। उनके परिवार में उनके चाचा, जो एक छोटे व्यापारी थे और उनके दादा जेल में कांस्टेबल थे। उनके घर में आय का एकमात्र स्रोत उनके दादा और चाचा की आय थी। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण अंगद अपनी पढ़ाई ठीक से पूरी नहीं कर सके।
अंगद बहुत कम उम्र में ट्यूशन कक्षाएं लेकर अपनी शिक्षा का खर्च उठाते थे।सालों तक काफी संघर्ष करने के बाद अंगद राज को 2019 में पहली सरकारी नौकरी मिली। उनका चयन मुंबई में रेलवे ग्रुप डी के लिए हुआ।
यार्ड में लगी रेलगाड़ी में अंगद करते थे गुजारा
अंगद रेलवे में नौकरी लगने के बाद यार्ड में लगी रेलगाड़ी में रहता था और वहीं पढ़ता और सोता था। दो साल तक ऐसा करने के बाद उन्होंने रेलवे छोड़ने का फैसला किया। फिर उन्होंने परीक्षा पास की और बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बन गए। उनके परिवार वाले नहीं चाहते थे कि वह पुलिस की नौकरी करें।
जिसके बाद अंगद का चयन बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के शाखा अधिकारी के पद पर हो गया। इसके बाद उन्होंने और मेहनत की और अब सचिवालय सहायक के पद तक पहुंच गए हैं। अंगद अभी भी इससे संतुष्ट नहीं हैं और उनका लक्ष्य बीपीएससी पास कर डीएसपी बनकर राज्य की जनता की सेवा करना है।












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