Success Story: पिता का अपमान बना बेटे का टर्निंग प्वाइंट, मुश्किल भरा था कामयाबी का सफ़र

Success Story:घर टूटने के बाद कमलेश के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। जैसे-तैसे यमुना के पार किराए पर मकान लेने के बाद सभी लोग वहां रहने लगे। परिवार की ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए कमलेश के पिता ने कभी कूली...

Success Story: बिहार जुडिशरी एग्जाम के नतीजे घोषित होने के बाद संघर्ष की कई दिलचस्प खबरें आपने पढ़ी होंगी। इसी क़ड़ी में हम आपको बिहार के सहरसा ज़िले के रहने वाले युवक कमलेश कुमार की कहानी बताने जा रहे हैं। कमलेश ने काफी मेहनत कर बिहार जुडिशरी एग्जाम में 64वां स्थान प्राप्त किया है। कमलेश की संघर्ष की कहानी युवाओं को प्रेरित करने वाली है। जिस तरह तंगी के हालात से जूझते हुए कमलेश ने यह मुकाम पाया है, वह काबिले तारीफ़ है। पिता के त्याग और कमलेश की सालों की मेहनत रंग लाई और उन्होंने कामयाबी की नई ईबारत लिखी।

बेहद ग़रीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं कमलेश

बेहद ग़रीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं कमलेश

कमलेश बहुत ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं, उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए अपने संघर्ष भरे सफर का जिक्र किया। कमलेश के पिता 10 भाई-बहन थे, परिवार की ज़िम्मेदारियों की वजह से उन्होंने गांव को छोड़ा और दिल्ली पहुंच गए। लेकिन परेशानियां तो उनके पिता के साथ साए की तरह मंडरा रही थी। दिल्ली आने के बाद झुग्गी-झोपड़ी में रहने लगे। इसी बीच सरकार का फरमान आया कि अवैध झुग्गी-झोपड़ी हटाएं जाएं। सरकार के इस आदेश के बाद लाल किले के पीछे सारे अवैध अस्थाई घर (झुग्गी-झोपड़ी) गिरा दिए गए।

मुश्किल भरा था कामयाबी का सफ़र

मुश्किल भरा था कामयाबी का सफ़र

घर टूटने के बाद कमलेश के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। जैसे-तैसे यमुना के पार किराए पर मकान लेने के बाद सभी लोग वहां रहने लगे। परिवार की ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए कमलेश के पिता ने कभी कूली का काम करते हुए यात्री का सामान उठाया तो कभी रिक्शा चलाकर ज़िंदगी बसर की। इन कामों से भी गुज़ारा नहीं होता था तो उनके पिता ने ठेले पर छोले-भटूरे भी बेचा। चांदनी चौक पर ठेला लगाने लगे। कमलेश अपने पिता के साथ ठेले के पास ही थे। उसी वक्त एक पुलिस वाले ने कमलेश के पिता को थप्पड़ मारा और उनकी जबरदस्ती दुकान बंद करवा दी।

पिता जी की बात ने चढ़ाई सफलता की सीढी

पिता जी की बात ने चढ़ाई सफलता की सीढी

पिता जी के अपमान से कमलेश बहुत मायूस हुए लेकिन कुछ करने में असमर्थ थे, क्योंकि उस वक्त वह सिर्फ दसवीं पास छात्र थे। कमलेश पिता ने एक दिन उनसे कहा कि जज से पुलिसवाले काफी डरते हैं। पिता जी के अपमान के बाद पिता जी की बात कमलेश के लिए कामयाबी की सीढ़ी बनी। उस दिन ही कमलेश ने यह फ़ैसला किया वह जज बनेंगे। इसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू की। कमलेश उस वक्त दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ कर रहे थे। उन्होंने लगन और मेहनत से तैयारी शुरू की।

दोस्त ने कॉल कर दी सेलेक्शन की जानकारी

दोस्त ने कॉल कर दी सेलेक्शन की जानकारी

कमलेश ने साल 2017 में यूपी जुडिशरी एग्ज़ाम दिया कामयाब नहीं हो पाए। फिर उन्होंने बिहार जुडिशरी एग्ज़ाम दिया लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। फिर कोरोना की दस्तक हुई और कमलेश के 3 साल बर्बाद हो गए। लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी और 31वां बिहार जुडिशरी एग्ज़ाम 2022 में उन्होंने कामयाबी का परचम लहरा ही दिया। जब रिज़ल्ट घोषित हुआ तो कमलेश को लिस्ट में अपना नाम नहीं दिखा, वह काफी निराश हो गए। फिर कमलेश के दोस्त ने कॉल पर उसके सेलेक्शन की बात बताई। कमलेश इस खबर को सुनते ही भावुक हो गए और उनके आखों में खुशी के आंसू आ गए।

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