SIR Update: ‘सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया, लेकिन लिखित आदेश चाहिए’, Voter List में नाम जोड़ने को लेकर BLO कंफ्यूज

SIR Update: बिहार में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मतदाता सूची (Voter List) में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को लेकर लोगों में हलचल बढ़ गई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जिनका नाम एसआईआर (Special Intensive Revision) के दौरान कट गया है, वे 1 सितंबर तक अपना नाम जुड़वा सकते हैं।

इसके लिए 11 अप्रूव्ड डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट भी जारी की गई है। ऑनलाइन विकल्प भी मौजूद है। लेकिन जमीनी हालात इस आदेश से बिल्कुल मेल नहीं खा रहे।

SIR Update Supreme Court

बीएलओ का तर्क - "लिखित आदेश का इंतजार"
बेगूसराय,पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, आरा, भोजपुर जैसे कई जिलों से लगातार शिकायतें आ रही हैं कि बीएलओ (BLO) लोगों के आवेदन लेने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक आदेश दिया है, लेकिन जब तक चुनाव आयोग की ओर से लिखित निर्देश नहीं आता, वे आधार कार्ड या अन्य दस्तावेज लेकर नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं करेंगे।

एक बीएलओ ने कहा - "भले ही सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है, लेकिन हमें चुनाव आयोग से लिखित आदेश का इंतजार है। बाद में इस आदेश को चुनौती दी जा सकती है, इसलिए हम रिस्क नहीं लेना चाहते।"

समय सीमा पर भी सवाल
भोजपुर की एक बीएलओ ने इस प्रक्रिया को अव्यावहारिक बताया। उनका कहना है कि "सिर्फ एक हफ्ते में वोटर लिस्ट से छूटे हुए लोगों से आधार कार्ड लेना और उन्हें सूची में शामिल करना मुश्किल है। चुनाव आयोग को समय सीमा बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।"

इंटरनेट और फॉर्म जमा करने की समस्या
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट की धीमी गति भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। वहीं, राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) भी सक्रिय सहयोग नहीं कर रहे। एक बीएलओ ने बताया कि "फॉर्म जमा करने में बीएलए बहुत कम मदद कर रहे हैं। ऐसे में पूरा बोझ बीएलओ पर आ जाता है।"

मतदाताओं की बढ़ी धड़कनें
सबसे ज्यादा परेशान वे लोग हैं जिनका नाम पिछले दो चुनावों तक सूची में था, लेकिन इस बार गायब हो गया। इन मतदाताओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश राहत की उम्मीद जगाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रक्रिया शुरू न होने से असमंजस और बढ़ गया है।

"लिखित आदेश" की शर्त ने उलझाया
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को मौका देकर राहत जरूर दी है, लेकिन बिहार के कई जिलों में बीएलओ की "लिखित आदेश" की शर्त ने इस प्रक्रिया को उलझा दिया है। अगर समय सीमा नहीं बढ़ाई गई और चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट गाइडलाइन जल्द जारी नहीं हुई, तो बड़ी संख्या में लोग मतदान से वंचित रह सकते हैं।

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