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SIR प्रक्रिया पर विपक्ष के नैरेटिव, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और जमीनी अव्यवस्थाओं ने बढ़ाई BJP की मुश्किलें

SIR Politics In Bihar: बिहार में चल रहे Systematic Voter's List Revision (SIR) अभियान का असर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर गहराई से महसूस किया जा रहा है। विपक्ष ने इस पूरे अभियान को लेकर जो नैरेटिव खड़ा किया है, उसका सीधा असर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर दिखने लगा है।

मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतों, बीएलओ की लापरवाही, प्रवासी वोटरों की मुश्किलें और सहयोगी दलों की बेचैनी ने भाजपा की नींद उड़ा दी है। वहीं एनडीए गठबंधन के घटक दलों के बीच भी मतभेद की ख़बर सामने आने लगी है।

SIR Process in Bihar

स्थानीय नेताओं की चिंता, विपक्ष के नैरेटिव में उलझी भाजपा
सूत्रों की मानें तो भाजपा के संगठन महामंत्री भिखुभाई दलसानिया ने राज्य पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे मतदाताओं से सीधे संपर्क करें और नाम जुड़वाने में सक्रिय मदद करें। भाजपा को डर है कि अगर मतदाता सूची से कोर वोटर छूट गए, तो आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

गठन मजबूत लेकिन तैयारी कमजोर
भले ही भाजपा के पास 52,000 से अधिक BLA (Booth Level Agent) हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में केंद्रों तक वे अब तक नहीं पहुंचे हैं। पार्टी के अपने आंकड़े बताते हैं कि कई क्षेत्रों में अब भी काफी काम बाकी है। कार्यकर्ताओं की धीमी गति और मतदाताओं तक सही जानकारी न पहुंच पाने से पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दस्तावेजों की उलझन और सुप्रीम कोर्ट की नजर
अब तक फॉर्म भरने वालों में से सिर्फ 30% लोग ही सही दस्तावेज जमा कर पाए हैं। शेष 70% ने या तो अधूरे दस्तावेज दिए हैं या पूरी जानकारी नहीं दी। इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए चुनाव आयोग से पूछा है कि आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड को क्यों अस्वीकार किया जा रहा है?

भारी पड़ सकती है प्रवासी मतदाताओं की अनदेखी
बिहार के 21% वोटर राज्य से बाहर रहते हैं। दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में रह रहे इन प्रवासी मतदाताओं के लिए 31 दिनों में दस्तावेज़ जमा करना बेहद कठिन है। ये मतदाता भाजपा का कोर सपोर्ट बेस माने जाते हैं और अगर इनमें से कुछ फीसदी भी वंचित रह गए, तो पार्टी को चुनावी समीकरण साधने में दिक्कत आ सकती है।

सहयोगी दलों का दबाव, NDA में भी बेचैनी
एनडीए के सहयोगी दल जैसे टीडीपी, जेडीयू और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ने SIR को लेकर खुलकर चिंता जताई है। इन दलों का दावा है कि उनके कोर वोटर - दलित, महिला और EBC वर्ग - दस्तावेज़ी प्रक्रिया के कारण पीछे छूट सकते हैं।

तीन तरफा दबाव में भाजपा
SIR प्रक्रिया के चलते भाजपा तीन तरफा दबाव में है। पहले तो विपक्षी दलों द्वारा गढ़ा गया नकारात्मक नैरेटिव बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा रहा है। वहीं जमीनी स्तर पर संगठन की धीमी गति और अव्यवस्था से शीर्ष नेतृत्व चिंता में है। सहयोगी दलों और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती भी परेशानी का सबब बनी हुई है। अगर समय रहते पार्टी ने इस पर ठोस रणनीति नहीं बनाई, तो आगामी चुनाव भाजपा के लिए मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं।

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