Voter List Controversy: तेजस्वी यादव के नाम पर जल्दबाज़ी में 3 बड़ी चूक!,पटना DM ने कहा- मामले की होगी जांच
Voter List Controversy , SIR 2025 Update: बिहार में विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच मतदाता सूची को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। इस मामले में विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में राजद नेता इमरान ने वन इंडिया हिंदी के वरिष्ठ संवाददाता इंज़माम वहीदी से बातचीत में कई हैरतअंगेज़ दावा किया है।
इमरान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादवका नाम हाल ही में प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में गायब पाया गया, प्रेस वार्ता के बाद आनन फानन में बदले हुए EPIC नंबर और कई विसंगतियों के साथ उनका नाम सूची में फिर से जोड़ा गया। इस घटना ने न केवल एक राजनीतिक भूचाल पैदा किया है, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और प्रक्रिया पर गहरी शंका खड़ी कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
राजद नेता इमरान ने इस मुद्दे पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि तेजस्वी यादव ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद बताया कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, उसके कुछ घंटों बाद ही आयोग ने आनन-फानन में उनका नाम जोड़ दिया। लेकिन यह जोड़ सिर्फ एक 'संशोधन' नहीं, बल्कि गंभीर तकनीकी अनियमितताओं से भरा हुआ है।
इमरान ने दावा किया कि तीन मुख्य विसंगतियां हुई हैं
EPIC नंबर में बदलाव: तेजस्वी यादव का पुराना EPIC नंबर अचानक ग़ायब कर एक नया नंबर जारी कर दिया गया, बिना किसी आवेदन या सूचना के। क्या ये मान्य प्रक्रिया है? क्या बिना आवेदन EPIC नंबर बदला जा सकता है? अगर ऐसा किया गया तो संबंधित व्यक्ति को सूचना क्यों नहीं दी गई।
मकान संख्या में विसंगति
तेजस्वी यादव के वोटर कार्ड पर जो मकान नंबर है, वह कई अन्य मतदाताओं के पहचान में भी शामिल है। एक उदाहरण मंटू कुमार नामक व्यक्ति के मकान संख्या में तेजस्वी यादव के वोटर कार्ड में मौजूद संख्या दर्ज कर दिया गया, जो पूरी तरह एक अलग पहचान को दर्शाता है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जानबूझकर तेजस्वी की पहचान को अस्पष्ट किया गया?
परिवार से अलग पहचान
नई सूची में तेजस्वी यादव को उनके परिवार के वोटिंग क्रम से अलग कर दिखाया गया है, जो वोटिंग पैटर्न और पहचान मिलान के लिहाज़ से चिंताजनक है। राजद नेता इमरान का आरोप है कि यह कोई तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि पूर्व नियोजित साज़िश है, जिसके जरिए विपक्षी नेताओं की साख और पहचान को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
यह केवल तकनीकी लापरवाही नहीं- इमरान
जब आम नागरिक EPIC संशोधन के लिए महीनों चक्कर काटता है, तब एक नेता का नाम महज़ घंटों में जोड़ना और वह भी इतनी भारी ग़लतियों के साथ यह केवल तकनीकी लापरवाही नहीं हो सकती। ये चुनाव आयोग की नीयत पर गंभीर सवाल है। अगर तेजस्वी यादव के पास दो वोटर कार्ड था तो इतने महीने से चल रही प्रकिया में चुनाव आयोग ने इससे पर्दा क्यों नहीं उठाया।
चुनाव आयोग और भाजपा ख़ामोश क्यों?
तेजस्वी यादव के पास अगर दो वोटर कार्ड हैं तो चुनाव आयोग के नियमनुसार वह अपराधी हैं। भाजपा इस मुद्दे पर काफी बवाल कर चुकी होती। इस मामले में तो चुनाव आयोग को साफ करना चाहिए कि ग़लती कहां हुई है। वोटर लिस्ट संशोधन को लेकर विपक्षी नेता लगातार हमलावर हैं तो फिर, भाजपा ने तेजस्वी के वोटर कार्ड पर आपत्ति क्यों नहीं जताई।
तेजस्वी यादव के वोटर कार्ड विवाद पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के दावे पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी यादव का नाम दीघा विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 204, घर संख्या 110 पर 1 अगस्त को जारी सूची में मौजूद है। तेजस्वी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया गया EPIC नंबर (RAB2916120) आयोग के किसी भी रिकॉर्ड में नहीं पाया गया, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर संदेह जताया गया है।
2020 में उनके नामांकन के दौरान प्रयुक्त EPIC नंबर (RAB0456228) को आयोग ने वैध और अब भी सक्रिय बताया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में किसी BLO या पार्टी प्रतिनिधि की ओर से पिछले 24 घंटों में कोई आपत्ति या दावा दर्ज नहीं किया गया है। अब यह प्रकरण तेजस्वी के दावे और आयोग की पारदर्शिता के बीच एक बड़ी राजनीतिक बहस बन चुका है, जिसकी निष्पक्ष जांच आयोग द्वारा की जा रही है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
राजद नेता इमरान ने कहा कि यह मुद्दा केवल तेजस्वी यादव का नहीं है। यह हर मतदाता के अधिकार और पहचान की रक्षा से जुड़ा सवाल है। EPIC नंबर, परिवार के साथ वोटिंग क्रम, और सही पते की जानकारी, ये सभी घटक मिलकर एक मतदाता की पहचान तय करते हैं। अगर इनमें जानबूझकर तोड़-मरोड़ की जाती है, तो इसका सीधा असर लोकतंत्र की पारदर्शिता और भरोसे पर पड़ता है।












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