'यहां जन्म से 18 माह के बच्चों को मुफ़्त में दूध मिलता है', चाय वाले की पहल के मुरीद हुए लोग
Shravan Tea Stall Nalanda: बिहार के विभिन्न ज़िले से नवजात को लावारिस मिलने की खबर अक्सर पढ़ने को मिल जाती है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे इंसान से मिलवाने जा रहे हैं, जो इस मतलबी ज़माने में भी इंसानियत की मिसाल बने हुए हैं।
हम बात कर रहे हैं, नालंदा ज़िले के श्रवण चाय वाले की, दरअसल साल 1990 में श्रवण कुमार नाम के सख्श ने चाय दुकान चलाने के साथ ही बच्चों को मुफ़्त में दूध पिलाने का नेक काम की शुरुआत की थी।

श्रवण कुमार बहुत ही बेहतरीन तरीक़े से अपने मुहिम को बिना किसी की मदद से चला रहे थे। 10 साल बाद उनकी मौत हो गई, इसके बाद उनके भाई ने जन्म से लेकर 18 महीने तक के बच्चों को मुफ़्त में दूध पिलाने की परंपरा जारी रखी।
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भाई की मौत के बाद इस परंपरा को श्रवण कुमार के छोटे भाई रंजीत कुमार (टुन्ना बाबा) ने जारी रखा। रंजीत ने बताया कि रोज़ाना करीब तीन लीटर दूध बच्चों को मुफ़्त में पिलाते हैं। वहीं पर्यटकों के सीज़न में क़रीब 10 लीटर दूध की खपत हो जाती है।
रंजीत ने भाई की बीती बातों को याद करते हुए बताया कि भैया ने जब चाय दुकान की शुरुआत की थी तो, उन्होंने देखा कि इलाके में बड़े लोगों के खाने की पूरी व्यवस्था है। बच्चों के दूध के लिए उनके मां-बाप परेशान हो रहे हैं।
इन्हीं परेशानियों को देखते हुए श्रवण कुमार ने मानव सेवा की नीयत से बच्चों को मुफ़्त में दूध पिलाने का काम शुरू किया था। लोगों को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने डोनोशन देना चाहा, लेकिन श्रवण कुमार ने इससे मना कर दिया।
भाई की मौत के बाद से उनके ही नक्शे कदम पर चलते हुए बच्चों के लिए मुफ़्त दूध की सेवा को श्रवण के भाई जारी रखे हुए है। गौरतलब है की आगामी 18 जुलाई से मलमास और श्रावणी मेला के दौरान श्रवण टी स्टॉल भी लगेगा।
श्रवण टी स्टॉल नालंदा ज़िले के राजगीर बस स्टेंड पर स्थित है, वहां से गुज़रने वाले राहगीर या अन्य लोग बोर्ड पर लिखी बात को पढ़कर इस पहल की तारीफ़ करते नहीं थक रहे हैं। उनका कहना है कि आज की इस मतलबी दुनिया में कौन इस तरह के नेक काम करता है। हम लोग इस पहल को देखते हुए इनके मुरीद हो गए।












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