Mothers Day: बेटी को स्कूल भेजने की चिंता से आया Idea, पूर्व एयरफोर्स की पत्नी ने फिर जो किया काबिले तारीफ है
Mothers Day Special: बच्चों की फिक्र एक मां से ज़्यादा किसी को नहीं होती है। यह बात हम आप हमेशा से ही सुनते आ रहे हैं। इस बात को बिहार के बेगूसराय निवासी सनोबर मेराज ने चरितार्थ कर दिखाया है। मदर्स डे के अवसर पर आज हम आपको पूर्व एयरफोर्स की पत्नी सनोबर मेराज की प्रेरणात्मक कहानी बता रहे हैं।
किड्स प्ले स्कूल के डायरेक्टर मेराजुल होदा (रिटायर्ड एयर फोर्स आर्मी) की पत्नी सनोबर मेराज ने वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में बताया कि किस तरह से वह एक मां सैकड़ों बच्चों की मां बन गई। उन्होंने बताया कि जब उनकी बच्ची दो साल की हुई तो स्कूल भेजने की चिंता हुई।

गांव में कोई अच्छा स्कूल नहीं था, इसलिए उन्होंने सोचा क्यों ने बच्चों के लिए एक स्कूल ही खोल दिया जाए। इससे उनकी बेटी भी पढ़ लेगी और गांव में छोटे बच्चों के लिए भी स्कूल की समस्या हल हो जाएगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए सनोबर ने समाजसेवा की नियत से स्कूल खोला।
समाज सेवा की नियत से काफी कम फीस रखते हुए स्कूल की शुरुआत की ताकि हर वर्ग के बच्चे शिक्षा हासिल कर पाएं। सनोबर मेराज ने बताया कि सैकड़ों बच्चों को शिक्षित करने पहले तो चुनौती पेश आई, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ अच्छा लगने लगा। बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही उनके माता-पिता को भी जागरूक करने का काम कर रही है।
अपने स्कूल के माध्यम से, उन्होंने एक ऐसा पोषण वातावरण बनाया है जो न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देता है बल्कि माता-पिता के बीच व्यक्तिगत विकास और जागरूकता को भी बढ़ावा दे रही है। शिक्षा के प्रति यह समग्र दृष्टिकोण हर समुदायों के लिए एक शक्तिशाली उदाहरण है। जिसकी समाज के लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।
सनोबर मेराज स्कूल के हर बच्चे को अपना मानकर, उन्हें न केवल अकादमिक विषय सिखा रही हैं, बल्कि जीवन के मूल्यवान सबक भी सिखा रही हैं। उनका काम पारंपरिक कक्षा से परे है, जो स्कूल और अभिभावकों के बीच समुदाय और साझा जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है।
सनोबर मेराज की पहल शिक्षा से परे है, यह माता-पिता को उनके बच्चों के विकास और सीखने की प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी के महत्व के बारे में जागरूक करने पर भी केंद्रित है। बच्चों की परवरिश में कई तरह की चुनौतियाँ आ सकती हैं, यह बात माता-पिता और शिक्षकों दोनों को ही अच्छी तरह समझ में आती है।
सनोबर के लिए यह काम दोहरा है, वह न केवल बच्चों को शिक्षित करती है, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम भी उठा रही हैं। उनकी कोशिश बच्चों को खाने से लेकर कपड़े पहनने तक सिखा रही हैं, ताकि नन्हे बच्चे का भविष्य शानदार रहे और वह कामयाबी की बुलंदियों को छूएं।












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